केंद्र तक पहुंचा करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले का मामला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल के निजी शिक्षण संस्थानों में फर्जी दाखिले दिखाकर करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पने का मामला केंद्र तक पहुंच गया है। केंद्र ने मामले में प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है।
जनजातीय कार्य और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने शिक्षा सचिव से अभी तक हुई जांच का स्टेटस पूछा है। केंद्र के ये दोनों मंत्रालय नियमित तौर पर छात्रवृत्ति आवंटन की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।
मामले में शिक्षा विभाग की लापरवाही सामने आने पर केंद्र सरकार विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं को दी जाने वाले राशि बंद भी कर सकती है। शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र के अधिकारियों को मामले से अवगत करवा दिया है।
आईएएस के बेटे को भी नहीं मिली छात्रवृत्ति
जांच को कमेटी गठित की है। तकनीकी सहायता को विजिलेंस ब्यूरो के साइबर सेल से मदद लेने पर विचार चल रहा है। पांच साल तक प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में छात्रवृत्ति राशि क्यों नहीं दी गई, इसकी मॉनीटरिंग कौन अधिकारी कर रहे थे। लापरवाही क्यों बरती गई। इन बिंदुओं पर जांच जारी है।
मामले की जांच में पता चला कि सचिवालय में तैनात एक आईएएस के बेटे को भी कुछ समय तक छात्रवृत्ति नहीं मिली। शिक्षा सचिव की जानकारी में मामला आने के बाद संबंधित संस्थान ने आनन-फानन में यह राशि जारी की।
विधायक रविंद्र कुमार ने भी सचिव से की शिकायत
जयसिंहपुर से विधायक रविंद्र कुमार ने अपने क्षेत्र के एक विद्यार्थी को दो साल तक छात्रवृत्ति नहीं मिलने और बाद में उसे संस्थान से बाहर निकालने का मामला शिक्षा सचिव से उठाया। सचिव के हस्तक्षेप के बाद छात्र को छात्रवृत्ति मिली और उसी संस्थान में पढ़ाई जारी रही।
जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति के लिए पात्र एक छात्रा के नाम पर निजी शिक्षण संस्थान ने हरियाणा के हिसार में फर्जी बैंक अकाउंट खोल दिया। छात्रा के आधार कार्ड नंबर से खोले फर्जी अकाउंट में छात्रवृत्ति सहित रसोई गैस सिलिंडर की सब्सिडी भी जाती रही।
पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में खोले फर्जी अकाउंट
शिक्षा विभाग की जांच टीम के मुताबिक निजी शिक्षण संस्थानों ने सरकारी धनराशि हड़पने को विद्यार्थियों के नाम पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के कई बैंकों में फर्जी खाते खोले। संस्थानों ने प्रवेश प्रक्रिया के समय विद्यार्थियों से बैंक अकाउंट खोलने को फॉर्म भरवाए।
बाद में प्रवेश नहीं दिया। अन्य संस्थानों में प्रवेश मिलने के बाद इन विद्यार्थियों ने अपने दस्तावेज भी आवेदन करने वाले संस्थानों से वापस नहीं लिए। इसका फायदा उठाते हुए संस्थानों ने अपने मोबाइल फोन नंबर लिखकर फर्जी खाते खोले।