एसएसए और आरएमएस का होगा विलय, सरकार ने इसलिए लिया फैसला
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राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) और टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम का केंद्र सरकार विलय करने जा रही है। शिक्षा विभाग के यह तीनों अभियान जल्द एक यूनिट के तौर पर काम करेंगे।
विलय को तीनों अभियानों की गुणवत्ता में सुधार लाने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस संदर्भ में सभी राज्यों के उच्च अधिकारियों की बैठक बुलाई है। इसमें हिमाचल के राज्य परियोजना निदेशक भाग लेंगे।
हिमाचल में पहली से आठवीं कक्षा तक सर्वशिक्षा अभियान, नवीं से जमा दो तक राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान लागू है, जबकि शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए एससीईआरटी काम करता है।
एसएसए और आरएमएसए के एक निदेशालय के तहत आते हैं, जबकि एससीईआरटी इस निदेशालय से बाहर हैं। उधर, देश के कई राज्यों में ये तीनों अभियान अलग-अलग विभागों के तहत आते हैं।
सरकार इसलिए करना चाहती है विलय
इनके तहत केंद्र सरकार द्वारा छात्रों के लिए चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को फंडिंग की जाती है। एसएसए, आरएमएसए और ट्रेनिंग के लिए अलग-अलग बजट आवंटित होता है। तीनों योजनाओं के उद्देश्य एक से हैं।
ऐसे में केंद्र सरकार ने इनका विलय करने का फैसला लिया है। विलय की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए इन दिनों मंथन चल रहा है। जानकार मानते हैं कि विलय होने से बजट का दुरुपयोग कम होगा।
आवंटित बजट के इस्तेमाल में लचीलापन बढ़ेगा। वर्तमान में एक योजना के लिए निर्धारित धनराशि का इस्तेमाल दूसरी योजना के लिए नहीं किया जा सकता है। ऐसे में वे राज्य जिन्होंने प्राथमिक शिक्षा में संतोषजनक प्रगति कर ली है
और बड़े बच्चों पर ध्यान देना चाहते हैं वे बजट का इस्तेमाल उनके लिए कर सकते हैं। इसके अलावा विलय होने से जिला स्तर पर डाइट, माध्यमिक शिक्षा विभाग और प्राथमिक शिक्षा विभाग के बीच तालमेल और समन्वय भी बढ़ेगा।