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Shimla News: भूमिगत डक्ट के निर्माण कार्य से मालरोड में दरारें, तारकोल उखड़ा, ढहने का खतरा

Thu, 26 Mar 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Mar 2026 11:59 PM IST
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Underground duct construction has caused cracks, tar peeling, and the risk of collapse on Mall Road.
जेबीसी
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से की जा रही खोदाई और कंपन से सड़क
के बीच नजर आ रहीं दरारें, सड़क
के डंगों
में भी पड़
चुकी हैं दरारें
बरसात में दरारों में पानी का रिसाव होने से होगी दिक्कत
150 करोड़ रुपये से चल रहा है डक्ट का निर्माण कार्य
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के छोटा शिमला से चौड़ा मैदान तक किए जा रहे भूमिगत यूटिलिटी डक्ट के निर्माण कार्य से शहर के मालरोड के कुछ हिस्से में बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं और इसमें बिछी तारकोल बुरी तरह उखड़ गई है। सड़क के डंगों में भी दरारें आ चुकी हैं।

बिजली, टेलीकॉम, इंटरनेट की तारों के जाल को हटाकर इन्हें डक्ट में से गुजारा जाना है ताकि शहर की सुंदरता बरकरार रहे। इस परियोजना पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस निर्माण कार्य के लिए मालरोड पर जेसीबी के साथ की जा रही खोदाई से जमीन ढीली पड़ रही है वहीं इससे होने वाली कंपन का असर सड़क किनारे लगी रेलिंग और सड़क को टिकाने के लिए लगे डंगों पर भी पड़ रहा है। इस वजह से इन स्थानों पर दरारें आ रही हैं। रेलिंग और सड़क के बीच की जमीन खिसक रही है। शहर के सौंदर्यीकरण के लिए किए जा रहे इस करोड़ों के कार्य से जमीन ढीली पड़ने पर पिछली बरसात की तरह हुई भारी बारिश के पानी का रिसाव हुआ तो इससे मालरोड की मुख्य सड़क के ढहने का खतरा हो सकता है।
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छोटा शिमला से लेकर हाईकोर्ट तक की सड़क के किनारे आबादी कम होने से यह कार्य तेज गति से हुआ। खोदाई से कोई नुकसान अभी तक नहीं हुआ है लेकिन हाईकोर्ट से आगे शैलेडे और ओबरॉय क्लार्क होटल के पास जमीन दरकने से दरारें नजर आ रही हैं। सरकार और लोक निर्माण विभाग के लिए इससे आगे घनी आबादी वाले मुख्य शहर के बीच डक्ट का कार्य करना अब चुनौती पूर्ण साबित होगा। सड़क के बीच से यदि बारिश के पानी का रिसाव हुआ तो सड़क ढहने के साथ ही आगे मकानों और दुकानों को भी खतरा हो सकता है। हालांकि जयपुर और जम्मू शहर में भी डक्ट का निर्माण कार्य हो चुका है लेकिन शिमला पहाड़ी क्षेत्र हैं तथा यहां की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं। वहीं सरकार का दावा है कि यह प्रोजेक्ट शिमला शहर की भूमि, मिट्टी और पत्थरों का अध्ययन कर ही अमल में लाई जा रही है। इससे मालरोड की सुंदरता बनी रहेगी और कोई नुकसान नहीं होगा।
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कोट
डक्ट के लिए की जा रही कटिंग के दौरान ढीली मिट्टी खिसक जाती है। इसको दुरुस्त करने का कार्य भी साथ-साथ किया जा रहा है। इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। निर्माण कार्य मालरोड और भवनों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही किया जा रहा है।
-प्रवीण वर्मा, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग
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