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Kalka Shimla Railway Track: पहली बार कालका-शिमला नैरोगेज ट्रैक पर दौड़ेगा तेज रफ्तार ट्रेन सेट
Wed, 25 Jan 2023 11:27 AM IST
Krishan Singh
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
विश्वास भारद्वाज, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 25 Jan 2023 11:27 AM IST
सार
रेल मंत्रालय ने कालका-शिमला हैरिटेज रेलवे ट्रैक पर रेल मोटरकार के स्थान पर ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) चलाने का फैसला लिया है। इनटीग्रल कोच फैक्टरी चेन्नई (आईसीएफ) में तीन कोच वाला ट्रेन सेट तैयार कर लिया गया है।
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शिमला रेलवे स्टेशन।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
देश में पहली बार नैरोगेज ट्रैक पर ट्रेन सेट चलाने की तैयारी है। रेल मंत्रालय ने कालका-शिमला हैरिटेज रेलवे ट्रैक पर रेल मोटरकार के स्थान पर ट्रेन सेट (सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट) चलाने का फैसला लिया है। इनटीग्रल कोच फैक्टरी चेन्नई (आईसीएफ) में तीन कोच वाला ट्रेन सेट तैयार कर लिया गया है। करीब दस दिन के भीतर ट्रेन सेट के कालका पहुंचने की उम्मीद है। दस दिन के बाद अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) लखनऊ कालका-शिमला के बीच ट्रेन सेट का ट्रायल करेगा।
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सामान्य गाड़ियां जहां कालका से शिमला पहुंचने में पांच घंटे लगाती हैं और रेल मोटरकार साढ़े चार घंटे में शिमला पहुंचती है। वहीं, नए ट्रेन सेट करीब 3 घंटे में शिमला पहुंचेंगे। इस गाड़ी को इंजन रहित ट्रेन भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें कोच को खींचने के लिए इंजन नहीं लगता। कोच के अंदर ही इंजन होता है। ट्रेन सेट को बर्फ से ढके पहाड़ों और बर्फ पर स्कीइंग के खूबसूरत दृश्यों से सजाया गया है। इसके अलावा खिड़की के नीचे रोप-वे की तस्वीरों को भी स्थान दिया गया है।
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आईसीएफ चेन्नई में ट्रेन सेट तैयार किया गया है। देश में पहली बार ट्रेन सेट नैरोगेज ट्रैक पर चलेगा। कालका पहुंचने के बाद आरडीएसओ इसका ट्रायल करेगा। रेलवे बोर्ड की अनुमति के बाद इसे कालका-शिमला ट्रैक पर उतार दिया जाएगा।- मनदीप सिंह भाटिया, डीआरएम, अंबाला
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120 साल पुराना है कालका-शिमला रेलमार्ग
विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला रेलवे मार्ग 120 साल पुराना है। 1896 में अंग्रेजों ने दिल्ली-अंबाला कंपनी को इसके निर्माण का काम सौंपा था। 96 किमी लंबे इस रेलमार्ग में 18 स्टेशन, 103 सुरंगें, 869 छोटे पुल, 919 घुमाव हैं। तीखे मोड़ों पर गाड़ी 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। इस नैरोगेज लाइन की चौड़ाई 2 फीट 6 इंच है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।