अब इस्तेमाल सेनेटरी नैपकिन से दूषित नहीं होगा पर्यावरण
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इस्तेमाल हो चुके सेनेटरी नैपकिन से पर्यावरण को अब नुकसान नहीं पहुंचेगा। सीवर, कचरे के गड्ढों, मैदानों और जल स्रोतों में बड़े पैमाने पर जमा हो रहे सेनेटरी नैपकिनों के निपटारे के लिए किन्नौरी स्वयं सहायता समूह ने ‘मासिकी भस्म चूल्हा’ तैयार किया है। तेल के टीन (पीपा) से यह चूल्हा तैयार किया गया है।
इसमें बाहर से मिट्टी और गोबर का लेप किया गया है। एक चीमनी रखी गई है जबकि इस्तेमाल हो चुकी सेनेटरी नैपकिन को डालने के लिए जगह भी बनाई गई है। बीच में जाली और नीचे से लकड़ी डालने के लिए जगह रखी गई है ताकि आसानी से नैपकिन का निपटारा किया जा सके।
धर्मशाला में चल रहे सरस मेले में ‘मासिकी भस्म चूल्हा’ के स्टॉल पर हर किसी के कदम रुक रहे हैं। कुल्लू जिला के विकास खंड नग्गर के किन्नौरी स्वयं सहायता समूह ने कबाड़ के जुगाड़ से बनी वस्तुओं के स्टॉल लगाए हैं।
स्टॉल में ‘मासिकी भस्म चूल्हा’ भी रखा गया है जिसमें महिलाएं नैपकिन को भस्म कर सकती हैं। किन्नौरी स्वयं सहायता समूह नग्गर से अभी तक सिर्फ 11 महिलाएं जुड़ी हैं, जिन्होंने घर के कबाड़ से बेहतर वस्तुएं तैयार की हैं। स्टॉल संचालिका सुमिता, दविना और मेघा ने बताया कि उन्हें घर के कबाड़ से ऐसे उत्पाद बनाने का आइडिया बीडीओ नग्गर कल्याणी गुप्ता ने दिया है।
फूलदान, आसन और कुशन भी कर रहे लोगों को आकर्षित
मेले में प्लास्टिक व शीशे की बेकार बोतलों से फूलदान, महिलाओं के पुराने दुपट्टे से बैठने के लिए आकर्षक आसन तैयार किए गए हैं। इसके अलावा दर्जी के कटिंग के बाद रहने वाले बेकार छोटे कपड़ों से भी छोटे कुशन बनाए गए हैं।