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Shimla News: फोरलेन टनल के निर्माण में अब नहीं होगी ब्लास्टिंग, मशीनों से होगी खोदाई
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एक्सकलूसिव
राजधानी शिमला के शांति विहार क्षेत्र में भवनों को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते एनएचएआई ने लिया फैसला
टनल के निर्माण से 14 भवनों में आ चुकी हैं दरारें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के शांति विहार क्षेत्र में निर्माणाधीन कैथलीघाट-ढली फोरलेन की ट्विन टनल (दो समानांतर सुरंगें) के निर्माण में अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ब्लास्टिंग नहीं करेगा।
टनल की आगे की खोदाई मशीनों के जरिये की जाएगी। निर्माण कार्य के चलते रिहायशी इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका के मद्देनजर एनएचएआई ने यह फैसला लिया है। फिलहाल मौके पर दोनों टनल का निर्माण कार्य बंद है। भविष्य में जब भी काम शुरू होगा तब ब्लास्टिंग नहीं की जाएगी। शिमला शहर के संजौली से सटे शांति विहार क्षेत्र में करीब 14 मकानों में दरारें आने के बाद एनएचएआई ने भूमिगत ब्लास्टिंग पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन की ओर से भी ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। पहले दी अनुमति रद्द कर दी है। एनएचएआई अब ब्लास्टिंग के लिए दोबारा अनुमति नहीं लेगा।
संजौली के नीचे भट्ठाकुफर से चलौंठी तक करीब 2.7 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल का निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद दहिया ने बताया कि कैथलीघाट-ढली फोरलेन के तहत बनाई जा रही ट्विन टनल के निर्माण में ब्लास्टिंग नहीं होगी। खोदाई का काम टनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से ही किया जाएगा ताकि आसपास के भवनों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो। टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले भवनों का सर्वेक्षण भी किया जा रहा है और उनकी मार्किंग की जा रही है। आईआईटी रुड़की की टीम के सर्वेक्षण की रिपोर्ट आने और प्रशासन के आदेशों के अनुसार ही टनल का रुका हुआ काम दोबारा शुरू किया जाएगा।
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खतरे की जद में 400 से अधिक भवन
स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल के ऊपर करीब 400 मकान बने हैं, जिन पर ब्लास्टिंग से खतरा मंडरा सकता है। एनएचएआई की ट्विन टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले करीब 450 भवनों के मालिक फोरलेन ट्विन टनल प्रभावित भवन मालिक संघर्ष समिति से जुड़ चुके हैं। समिति के व्हाट्सएप ग्रुप से भी भवन मालिक जुड़े हुए हैं। संघर्ष समिति अपना पंजीकरण करवाने की तैयारी कर रही है। इसके बाद समिति का अलग बैंक खाता खोला जाएगा और संघर्ष की आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
संघर्ष समिति में शामिल शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा, भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर, भवन मालिक गोविंद चितरांटा, पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान और अन्य कार्यकारिणी सदस्य टनल का निर्माण पुराने सर्वे के अनुसार किए जाने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि यदि इसके बावजूद टनल का निर्माण किया गया तो यह मानव निर्मित आपदा को न्योता देने जैसा होगा। समिति के सदस्यों का सवाल है कि पुराने सर्वे के तहत 12 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद वहां निर्माण क्यों नहीं किया गया। उनका दावा है कि पुराने सर्वे के दौरान कई घरों को उजाड़ा गया था जबकि सर्वे में बदलाव के बाद अब 500 से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है।
कंपनी कर रहे भवनों का सर्वेक्षण, हो रही मार्किंग
शिमला। ट्विन टनल के एलाइनमेंट के अनुसार बनाई जा रही दोनों समानांतर टनल के बीच 20 मीटर का अंतर रखा जा रहा है। टनल के आसपास के क्षेत्र में बने भवनों का एनएचएआई और निर्माण कंपनी की ओर से सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान टनल के एलाइनमेंट के ठीक ऊपर बने भवनों को लाल, दोनों टनल के बीच के दायरे में आने वाले भवनों को पीले और बाहर के 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों को हरे रंग से चिह्नित किया जा रहा है।भवन मालिकों का कहना है कि सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारी उनसे केवल एक फॉर्म भरवा रहे हैं। इन्हें सर्वेक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी जा रही है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि भवन मालिकों को सर्वेक्षण के उद्देश्य, प्रक्रिया और निष्कर्षों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई जाए।
उद्घाटन से पहले वर्षाशालिका के फर्श में दरारें
शिमला। संजौली टनल के पास शांति विहार में नगर निगम की ओर से स्मार्ट सिटी परियोजना के बजट से बनाई गई वर्षाशालिका के फर्श में भी नई दरार दिखाई दी है। अभी तक इस वर्षाशालिका का लोकार्पण नहीं हुआ है, लेकिन इसके फर्श में दरार साफ नजर आने लगी हैं। यह वही क्षेत्र है, जहां करीब 14 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। स्थानीय लोग इन दरारों के लिए टनल निर्माण को जिम्मेदार मान रहे हैं। हालांकि दरारों के वास्तविक कारण की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
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राजधानी शिमला के शांति विहार क्षेत्र में भवनों को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते एनएचएआई ने लिया फैसला
टनल के निर्माण से 14 भवनों में आ चुकी हैं दरारें
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला के शांति विहार क्षेत्र में निर्माणाधीन कैथलीघाट-ढली फोरलेन की ट्विन टनल (दो समानांतर सुरंगें) के निर्माण में अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ब्लास्टिंग नहीं करेगा।
टनल की आगे की खोदाई मशीनों के जरिये की जाएगी। निर्माण कार्य के चलते रिहायशी इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचने की आशंका के मद्देनजर एनएचएआई ने यह फैसला लिया है। फिलहाल मौके पर दोनों टनल का निर्माण कार्य बंद है। भविष्य में जब भी काम शुरू होगा तब ब्लास्टिंग नहीं की जाएगी। शिमला शहर के संजौली से सटे शांति विहार क्षेत्र में करीब 14 मकानों में दरारें आने के बाद एनएचएआई ने भूमिगत ब्लास्टिंग पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन की ओर से भी ब्लास्टिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी। पहले दी अनुमति रद्द कर दी है। एनएचएआई अब ब्लास्टिंग के लिए दोबारा अनुमति नहीं लेगा।
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संजौली के नीचे भट्ठाकुफर से चलौंठी तक करीब 2.7 किलोमीटर लंबी ट्विन टनल का निर्माण किया जा रहा है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक आनंद दहिया ने बताया कि कैथलीघाट-ढली फोरलेन के तहत बनाई जा रही ट्विन टनल के निर्माण में ब्लास्टिंग नहीं होगी। खोदाई का काम टनल निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनों से ही किया जाएगा ताकि आसपास के भवनों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम हो। टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले भवनों का सर्वेक्षण भी किया जा रहा है और उनकी मार्किंग की जा रही है। आईआईटी रुड़की की टीम के सर्वेक्षण की रिपोर्ट आने और प्रशासन के आदेशों के अनुसार ही टनल का रुका हुआ काम दोबारा शुरू किया जाएगा।
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खतरे की जद में 400 से अधिक भवन
स्थानीय लोगों का कहना है कि टनल के ऊपर करीब 400 मकान बने हैं, जिन पर ब्लास्टिंग से खतरा मंडरा सकता है। एनएचएआई की ट्विन टनल के एलाइनमेंट के दायरे में आने वाले करीब 450 भवनों के मालिक फोरलेन ट्विन टनल प्रभावित भवन मालिक संघर्ष समिति से जुड़ चुके हैं। समिति के व्हाट्सएप ग्रुप से भी भवन मालिक जुड़े हुए हैं। संघर्ष समिति अपना पंजीकरण करवाने की तैयारी कर रही है। इसके बाद समिति का अलग बैंक खाता खोला जाएगा और संघर्ष की आगामी रणनीति तैयार की जाएगी।
संघर्ष समिति में शामिल शांति विहार के पार्षद विनीत शर्मा, भट्ठाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर, भवन मालिक गोविंद चितरांटा, पूर्व पार्षद राजेंद्र चौहान और अन्य कार्यकारिणी सदस्य टनल का निर्माण पुराने सर्वे के अनुसार किए जाने की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि यदि इसके बावजूद टनल का निर्माण किया गया तो यह मानव निर्मित आपदा को न्योता देने जैसा होगा। समिति के सदस्यों का सवाल है कि पुराने सर्वे के तहत 12 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद वहां निर्माण क्यों नहीं किया गया। उनका दावा है कि पुराने सर्वे के दौरान कई घरों को उजाड़ा गया था जबकि सर्वे में बदलाव के बाद अब 500 से अधिक घरों पर खतरा मंडरा रहा है।
कंपनी कर रहे भवनों का सर्वेक्षण, हो रही मार्किंग
शिमला। ट्विन टनल के एलाइनमेंट के अनुसार बनाई जा रही दोनों समानांतर टनल के बीच 20 मीटर का अंतर रखा जा रहा है। टनल के आसपास के क्षेत्र में बने भवनों का एनएचएआई और निर्माण कंपनी की ओर से सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वेक्षण के दौरान टनल के एलाइनमेंट के ठीक ऊपर बने भवनों को लाल, दोनों टनल के बीच के दायरे में आने वाले भवनों को पीले और बाहर के 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों को हरे रंग से चिह्नित किया जा रहा है।भवन मालिकों का कहना है कि सर्वेक्षण करने वाले कर्मचारी उनसे केवल एक फॉर्म भरवा रहे हैं। इन्हें सर्वेक्षण से संबंधित विस्तृत जानकारी नहीं दी जा रही है। संघर्ष समिति ने मांग की है कि भवन मालिकों को सर्वेक्षण के उद्देश्य, प्रक्रिया और निष्कर्षों के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाई जाए।
उद्घाटन से पहले वर्षाशालिका के फर्श में दरारें
शिमला। संजौली टनल के पास शांति विहार में नगर निगम की ओर से स्मार्ट सिटी परियोजना के बजट से बनाई गई वर्षाशालिका के फर्श में भी नई दरार दिखाई दी है। अभी तक इस वर्षाशालिका का लोकार्पण नहीं हुआ है, लेकिन इसके फर्श में दरार साफ नजर आने लगी हैं। यह वही क्षेत्र है, जहां करीब 14 मकानों में दरारें आ चुकी हैं। स्थानीय लोग इन दरारों के लिए टनल निर्माण को जिम्मेदार मान रहे हैं। हालांकि दरारों के वास्तविक कारण की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।