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Himachal: प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण को केंद्र ने दिए 220 करोड़

Sat, 26 Jul 2025 10:05 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 26 Jul 2025 10:05 AM IST
सार

संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को बताया कि हिमाचल सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के पुनर्निर्माण के लिए 228.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता (ऋण) की मांग की थी। केंद्र सरकार ने 220.10 करोड़ रुपये राज्य को जारी कर दिए हैं।

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The Centre has given Rs 220 crore for the reconstruction of infrastructure damaged by natural disasters
प्रदेश को मिली 220 करोड़ की राशि। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। संसद में पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को बताया कि हिमाचल सरकार ने वर्ष 2024-25 के लिए प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त अवसंरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर) के पुनर्निर्माण के लिए 228.50 करोड़ रुपये की विशेष सहायता (ऋण) की मांग की थी। केंद्र सरकार ने 220.10 करोड़ रुपये राज्य को जारी कर दिए हैं।

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सिकंदर कुमार ने संसद में प्रश्न पूछा था कि क्या हिमाचल सरकार ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता मांगी है और क्या जमीनी स्तर पर जलवायु समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र की कोई योजना है। इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने विस्तार से जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हिमाचल में जलवायु परिवर्तन को देखते हुए राज्य ने ऊर्जा, जल, वन, स्वास्थ्य और ग्रामीण आजीविका जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित अनुकूलन और उपशमन कार्यों को एकीकृत कर जलवायु परिवर्तन राज्य कार्ययोजना 2021-30 तैयार की है। इस योजना का उद्देश्य हिमाचल को कार्बन तटस्थ राज्य बनाना है।

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केंद्रीय मंत्री ने बताया कि हिमाचल सहित चार राज्यों में 150 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) जोखिम उपशमन परियोजना चलाई जा रही है, जिससे अचानक झील फटने से होने वाली बाढ़ की आशंका को कम किया जा सके। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने हिमाचल में 958 हिमनद झीलों की सूची तैयार की है। ये झीलें जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए इनके प्रभावों पर लगातार नजर रखी जा रही है। मंत्री ने कहा कि हिमाचल में विशेष अनुसंधान और विकास परियोजना पहल के अंतर्गत पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए शैक्षणिक संस्थानों, प्रयोगशालाओं और मान्यता प्राप्त शोध संस्थानों को वित्तीय मदद दी जा रही है। इसका उद्देश्य नई तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देकर राज्य को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों से बचाना है।

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