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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The 122-year-old Shimla Kalka rail track, with its 102 tunnels, thrills tourists; read its fascinating history

Shimla: सैलानियों में रोमांच भरता है 122 साल पुराना 102 सुरंगों वाला शिमला-कालका ट्रैक का सफर, पढ़ें इतिहास

Mon, 10 Nov 2025 02:30 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 10 Nov 2025 02:30 PM IST
सार

ब्रिटिश शासनकाल में 9 नवंबर 1903 को यातायात के लिए खोले गए रेल ट्रैक ने 122 साल पूरे कर लिए हैं। इस हेरिटेज ट्रैक पर 9 नवंबर 1903 को स्टीम इंजन से छुक-छुक कर पहली ट्रेन चली थी।

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The 122-year-old Shimla Kalka rail track, with its 102 tunnels, thrills tourists; read its fascinating history
शिमला रेलवे स्टेशन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व धरोहर शिमला-कालका रेल मार्ग 123वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इस ट्रैक पर ट्रेन का सफर अभी भी सैलानियों में रोमांच भरता है। ब्रिटिश शासनकाल में 9 नवंबर 1903 को यातायात के लिए खोले गए रेल ट्रैक ने 122 साल पूरे कर लिए हैं। इस हेरिटेज ट्रैक पर 9 नवंबर 1903 को स्टीम इंजन से छुक-छुक कर पहली ट्रेन चली थी। अब डीजल इंजन से चल रही ट्रेनों का सफर बिना इंजन की ट्रेन तक पहुंच गया है। रेलवे की ओर से अगस्त 2024 में किया गया बिना इंजन की ट्रेन का ट्रायल सफल रहा। शिमला से कालका के लिए जल्द ही सेल्फ प्रोपेल्ट हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट ट्रेनसेट चलाने की तैयारी है।

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साल 1970 में स्टीम इंजन को बंदकर डीजल इंजन से ट्रेनों का संचालन शुरू हुआ। डीजल इंजन में सामान्य कोच के साथ विस्ताडोम कोच और रेलमोटर कार की सुविधा भी मिल रही है। विस्ताडीम कोच में बैठने के लिए आरामदायक कुर्सियां हैं। इसके अलावा हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की भी योजना है। इसके लिए शिमला से कालका मार्ग में तीन हाइड्रोजन गैस स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। हाइड्रोजन ट्रेन को प्रदूषण रहित स्वच्छ माना जाता है और वातावरण के अनुकूल है।

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पुराना बस अड्डा के पास बने बाबा भलकू रेल संग्रालय में फालका शिमला रेलवे का इतिहास संजोकर रखा गया है। यहां 1903 में ट्रेनों को दुरुस्त करने वाले औजारों के साथ स्टीम इंजन के साथ चल रही ट्रेन के चित्र भी शामिल हैं। शिमला-कालका ट्रैक की कुल लंबाई 96.60 किलोमीटर है। रेल लाइन में 18 स्टेशन, 102 टनल और 912 ब्रिज है। बड़ोग टनल सबसे लंबी 1143 मीटर है। साल 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अ भी इस मार्ग से यात्रा की है।

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यूनेस्को से मिला है विश्व धरोहर का दर्जा
साल 1864 में अंग्रेजों ने शिमला को अपनी शीतकालीन राजधानी बनाया था। इसके बाद कोलकाता से शिमला आने के लिए इस नैरोगेज लाइन को पिछाने की योजना बनाई गई। इस रेल लाइन के लिए सबसे पहले साल 1984 में सर्वे करवाया गया था। हालांकि इसके बाद कई सबै हुए। साल 1898 में इसका कार्य शुरू हुआ और 1903 में काम पूरा पर इसे यातायात के लिए खोला गया। 8 जुलाई 2008 को यूनेस्को ने इस ट्रैक को विश्व धरोहर का दर्जा दिया। गिनीज बुक ऑफ रेल फक्टस एंड फोट ने कालका शिमला रेलवे को भारत में छोटी लाइन की महानतम इंजीनियरिंग के रूप में रिकॉर्ड किया है।

रेलवे के डीआरएम अंबाला मंडल ने बताया कि शिमला-कालका रेल मार्ग 9 नवंबर को 122वें साल में प्रवेश कर गया है। 1903 में यातायात के शुरू किए ट्रैक पर स्टीम इंजन से ट्रेन का संचालन किया जाता था। अब डीजल इंजन से देने चलाई जा रही है। इस ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन चलाने की भी योजना है। 

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