वेतन कटौती पर भड़के शिक्षक, अब कोर्ट जाने की तैयारी
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प्रदेश के हजारों शिक्षकों के वेतन में कटौती के आदेश से शिक्षक संगठन भड़क गए हैं। शिक्षा विभाग के खिलाफ संगठन हाईकोर्ट में जाने की तैयारी में हैं। चार शिक्षक संगठनों प्रदेश शिक्षक महासंघ, प्रदेश स्नातकोत्तर अध्यापक संघ, प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ और हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने टीजीटी, पीजीटी को लेकर शिक्षा विभाग पर तुगलकी आदेश जारी करने का आरोप लगाया है।
इनका कहना है कि नियमित होने पर तनख्वाह बढ़ाना तो दूर शिक्षकों के वेतन में कटौती कर शोषण किया जा रहा है। संगठन पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। प्रदेश शिक्षक महासंघ ने शिक्षा विभाग की वेतन कटौती और रिकवरी की अधिसूचना का विरोध किया है।
प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. मामराज पुंडीर, प्रांत संगठन मंत्री पवन मिश्रा, अतिरिक्त महामंत्री विनोद सूद, प्रांत महामंत्री जगवीर चंदेल, प्रांत उपाध्यक्ष जय शंकर ठाकुर, प्रांत कोषाध्यक्ष तीर्थ नंद, मीडिया प्रभारी अशोक शर्मा ने कहा कि मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
कहा कि जो अध्यापक 2014-15 में नियमित हुए थे, उन्होंने इसके लिए 12 साल तक इंतजार किया। विभाग ने इन्हें 14430 रुपये के न्यूनतम पे बैंड पर फिक्स किया, अब रिकवरी के आदेश दिए जा रहे हैं। ऐसे तुगलकी आदेशों पर तुरंत रोक लगाकर नियमित शिक्षकों को बढ़े हुए वेतन पर फिक्स किया जाए।
शिक्षकों ने दी आंदोलन की चेतावनी
अनुबंध अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेंद्र वर्मा, महासचिव राजकुमार, वरिष्ठ उपाध्यक्ष नरेश कुमार, वित्त सचिव अंकुर सूद, मुख्य सलाहकार अजय ठाकुर, उपाध्यक्ष विनीत पठानिया, सुनील, नरेश धीमान, नरेंद्र शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, सुनील कटोच, राजेंद्र शर्मा, सुंदर भगत नेगी, सचिव कैलाश नाथ शर्मा, सुशील चंदेल, यशवीर रणौत, चंद्रकांत ठाकुर, इंद्रजीत ठाकुर, ओम चौहान, रमेश चंद, मनोज नेगी, नरेश शर्मा, कुलविंद्र ठाकुर, कमल चौहान और मनोज चंदेल ने सरकार से वेतन कटौती को वापस लेने की मांग की है।
ऐसा नहीं होने पर संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है। स्नातकोत्तर अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष चितरंजन कालटा, महासचिव डा. देवेंद्र शर्मा, वित्त सचिव रामलाल, उपाध्यक्ष मनीष शर्मा ने कहा कि सरकार विधायकों, मंत्रियों और नौकरशाहों के वेतन में दो से तीन गुना बढ़ोतरी कर रही है। शिक्षकों को पहले से मिल रहे वित्तीय लाभों से वंचित किया जा रहा है। उधर, राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने भी मुख्यमंत्री से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।