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Supreme Court: पात्रता रखना, आवेदन करना ही नियुक्ति का अधिकार नहीं
Fri, 10 Feb 2023 10:42 AM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 10 Feb 2023 10:42 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज करते हुए कहा कि चयन कमेटी ने एचपीयू में अतिरिक्त रजिस्ट्रार हिंदी के पद के लिए याचिकाकर्ता का चयन नहीं किया था। इस स्थिति में हाईकोर्ट की ओर से याचिका को खारिज किया जाना उचित है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
पात्रता और नियुक्ति से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की ओर से सुनाए गए निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने मुहर लगा दी है। हिमाचल हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी थी कि केवल पात्रता रखना और आवेदन करना ही नियुक्ति का अधिकार नहीं है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने एचपीयू में अतिरिक्त रजिस्ट्रार हिंदी के पद पर तैनाती के मामले में यह निर्णय सुनाया था।
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याचिकाकर्ता विनय कुमार ने हाईकोर्ट के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी को खारिज करते हुए कहा कि चयन कमेटी ने एचपीयू में अतिरिक्त रजिस्ट्रार हिंदी के पद के लिए याचिकाकर्ता का चयन नहीं किया था। इस स्थिति में हाईकोर्ट की ओर से याचिका को खारिज किया जाना उचित है। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि इस पद को हिमाचल विश्वविद्यालय की ओर से दोबारा विज्ञापित किया गया है।
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योग्यता नियमों में बदलाव के कारण याचिकाकर्ता अब इस पद के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह योग्यता नियमों में बदलाव को सक्षम याचिका के तहत चुनौती दे सकता है। मामले के अनुसार हिमाचल विश्वविद्यालय ने 30 दिसंबर 2019 को अतिरिक्त रजिस्ट्रार हिंदी के पद को भरने के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता ने भी इस पद के लिए आवेदन किया था। 10 जनवरी 2022 को विश्वविद्यालय ने इसके लिए साक्षात्कार लिया था।
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चयन कमेटी ने याचिकाकर्ता को इस पद के लिए उपयुक्त नहीं पाया और संजय कुमार को इस पद पर तैनात करने की सिफारिश की। बाद में विश्वविद्यालय ने इस पद को दोबारा से विज्ञापित किया। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी कि इस खाली पद के लिए उसकी नियुक्ति देने के आदेश दिए जाए। हाईकोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि केवल पात्रता रखना और आवेदन करना ही नियुक्ति का अधिकार नहीं है।