फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Supreme Court's special bench will hear encroachment cases, case sent to CJI

Himachal: सुप्रीम कोर्ट की विशेष खंडपीठ करेगी अतिक्रमण के मामलों की सुनवाई, यथास्थिति बनाए रखने के दिए आदेश

Fri, 07 Mar 2025 10:03 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 07 Mar 2025 10:03 AM IST
सार

सीजेआई) की ओर से अतिक्रमण मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष खंडपीठ गठित की जाएगी। अभी तक सुप्रीम कोर्ट में अतिक्रमण के मामले अलग-अलग बेंच के समक्ष लग रहे थे। 

विज्ञापन
Supreme Court's special bench will hear encroachment cases, case sent to CJI
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की ओर से अतिक्रमण मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष खंडपीठ गठित की जाएगी। अभी तक सुप्रीम कोर्ट में अतिक्रमण के मामले अलग-अलग बेंच के समक्ष लग रहे थे। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सुधांशु धूलिया और न्यायाधीश के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने अतिक्रमण मामलों की सुनवाई के दौरान पाया कि ऐसे ही एक अन्य मामले में 28 नवंबर को एक ही दिन में स्वयं न्यायाधीश सुधांशु की पीठ ने एक याचिका खारिज की है। वहीं, दूसरी पीठ ने अनुमति दी है। खंडपीठ ने दो अलग-अलग निर्णयों की वजह से मामले को मुख्य न्यायाधीश को भेजा है।

विज्ञापन

अतिक्रमण मामलों में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अतिक्रमण मामलों में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट के आदेशों को चुनौती दी गई है, जिसमें इन सब याचिकाकर्ताओं को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने पर बेदखली के आदेश दिए हैं। खंडपीठ के आदेश के बाद अब ऐसे मामलों की सुनवाई एक ही बेंच करेगी। खंडपीठ की ओर से कहा गया कि इस तरह के मुद्दों के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से एक विशेष पीठ का गठित की जाए। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकारी भूमि पर कोई अतिक्रमण नहीं किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं ने दिया ये तर्क
ये जमीन बाखल-अव्वल है, जिस पर पूर्वजों से लेकर काम किया जा रहा है। वन विभाग की ओर से सार्वजनिक परिसर एवं भूमि बेदखली व किराया वसूली अधिनियम 1971 (पीपी एक्ट) की धारा 4 के तहत जो कार्रवाई की गई है, वह न्यायसंगत नहीं है और प्राकृतिक सिद्धांत के खिलाफ है। अधिवक्ता ने कहा कि शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने 28 नवंबर को बाबू राम बनाम हिमाचल प्रदेश में कहा है कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करते हुए निचले स्तर पर ही अधिकारियों की ओर से गलती की गई है और तथ्यों की अनदेखी की गई है। शीर्ष अदालत ने फैसले में कहा था कि ऐसे मामलों की फिर से सुनवाई हो। शीर्ष अदालत में ऐसे 30 के करीब मामले सुनवाई के लिए लगे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed