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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Supreme Court Imposes Rs 25000 Cost On Himachal Pradesh Govt

Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार पर लगाया 25 हजार रुपये जुर्माना

Sun, 23 Jul 2023 01:13 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 23 Jul 2023 01:13 PM IST
सार

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये के जुर्माने के साथ अपील को खारिज कर दिया। जुर्माने का भुगतान हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिकाकर्ताओं को किया जाएगा।

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Supreme Court Imposes Rs 25000 Cost On Himachal Pradesh Govt
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर कड़ी अस्वीकृति जताई है जिसमें एक व्यक्ति की संपत्ति को निष्क्रांत संपत्ति घोषित करने के राज्य के निर्णय को रद्द कर दिया गया था। राज्य इस तथ्य से भलीभांति अवगत था कि संपत्ति का मालिक कभी पाकिस्तान नहीं गया और 1983 में भारत में ही उसकी मृत्यु हुई थी। ‘निष्क्रांत संपत्ति’ शब्द का उपयोग विभाजन के दौरान पाकिस्तान चले गए लोगों द्वारा छोड़ी गई संपत्ति को संदर्भित करने के लिए किया जाता है।

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जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने राज्य सरकार पर 25 हजार रुपये के जुर्माने के साथ अपील को खारिज कर दिया। जुर्माने का भुगतान हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिकाकर्ताओं को किया जाएगा। पीठ ने अपने आदेश में कहा, स्वीकृत स्थिति के बावजूद कि उस व्यक्ति (संपति मालिक) ने कभी भारत नहीं छोड़ा और अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा दिए गए तथ्यों के बावजूद, राज्य ने एकल न्यायाधीश और खंडपीठ के आदेशों के खिलाफ अपील दायर करने का विकल्प चुना है।
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राज्य की इस कार्रवाई की निंदा की जानी चाहिए। याचिका में राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि सुल्तान मोहम्मद की संपत्ति निष्क्रांत संपत्ति प्रशासन अधिनियम, 1950 की धारा 2 (एफ) के अर्थ के तहत एक निष्क्रांत संपत्ति है क्योंकि उक्त व्यक्ति 1950 अधिनियम की धारा 2 के खंड (डी) के अर्थ के अंतर्गत एक निष्क्रांत व्यक्ति था।
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एकलपीठ के फैसले पर गौर करने के बाद पीठ ने कहा, हमने पाया है कि न्यायाधीश ने माना है कि राज्य ने अपने जवाब में स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि सुल्तान मोहम्मद कभी पाकिस्तान नहीं गया था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश ने यह माना था कि सुल्तान मोहम्मद की संपत्ति को निष्क्रांत संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकता था और इसलिए उसकी संपत्ति को निष्क्रांत संपत्ति घोषित करने की कार्रवाई को रद्द कर दिया गया था।

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