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बुलंद हौसला: गरीबी भी नहीं रोक पाई रुचि के सपनों की उड़ान, भारतीय कबड्डी टीम में खेलेगी

Mon, 04 Apr 2022 12:44 PM IST
अरविन्द ठाकुर हरिकृष्ण शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आनी (कुल्लू)
हरिकृष्ण शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, आनी (कुल्लू) Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 04 Apr 2022 12:44 PM IST
सार

बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाली रुचि जब लूहरी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं तो उनका चयन जिला स्तरीय अंडर-14 कबड्डी प्रतियोगिता के लिए हुआ था। यहां बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ। 

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sub inspector himachal police ruchi in indian women's kabaddi team
सब इंस्पेक्टर नित्थर की रुचि। - फोटो : संवाद

विस्तार

कबड्डी में नाम कमाने के लक्ष्य के आगे रोड़ा बनी गरीबी भी रुचि के सपनों की उड़ान को नहीं रोक पाई। खेल के प्रति जुनून और कड़ी मेहनत के दम पर आज रुचि को भारतीय कबड्डी टीम में स्थान बना लिया है। आर्थिक तंगी के चलते जब माता-पिता ने रुचि की पढ़ाई और खेल के लिए खर्च से हाथ खड़े कर दिए तो नाना हौसला बनकर लाडली के साथ खड़े रहे। उन्होंने पढ़ाई से लेकर सभी तरह का खर्च उठाकर रुचि के सपने को पूरा किया।  

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आनी विधानसभा क्षेत्र की नित्थर उप तहसील के ढमाह गांव की 20 वर्षीय रुचि अब स्पोर्ट्स कोटे से पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। स्पोर्ट्स स्टेट हॉस्टल बिलासपुर से स्नातक की पढ़ाई के दौरान गुजरात, कबीरधाम और गोवा में हुई राष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता में रुचि ने स्वर्ण पदक जीतकर सूबे का नाम रोशन किया है। अब भारतीय टीम से नेपाल में दमखम दिखाएंगी। 19 अप्रैल से नेपाल में अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्रतियोगिता होगी। 
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बेहद गरीब परिवार से संबंध रखने वाली रुचि जब लूहरी स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती थीं तो उनका चयन जिला स्तरीय अंडर-14 कबड्डी प्रतियोगिता के लिए हुआ था। यहां बेहतर प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता के लिए हुआ। 
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स्पोर्ट्स स्टेट हॉस्टल बिलासपुर से पत्र आया तो रुचि ने परिवार को बताया। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण माता-पिता ने रुचि को भेजने से मना कर दिया। रुचि के नाना सतीश कुमार ने हरसंभव मदद की। रुचि की पढ़ाई का सारा खर्च उनके नाना ने ही उठाया। संवाद


लोगों ने कई तरह की बातें कीं, कम नहीं हुआ हौसला
आनी कॉलेज में सम्मान समारोह के दौरान रुचि ने कहा कि उन्हें घुटनों में बहुत दर्द रहता था। इस कारण वह घर भी नहीं आ सकती थीं। लोगों ने कई तरह की बातें कीं, लेकिन उन्होंने हौसला नहीं हारा। जब लूहरी स्कूल से स्पोर्ट्स हॉस्टल बिलासपुर के लिए चयनित हुईं तो भी लोगों ने कई बातें कही, लेकिन बिना किसी की परवाह किए अपने लक्ष्य पर फोकस रखा। उनके नाना सतीश कुमार ने कभी हौसला नहीं हारने दिया। उनकी प्रेरणा से ही आज वह इस मुकाम पर पहुंची हैं। 

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