फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Study reveals: 22 out of 1000 babies are dying before birth

अध्ययन में खुलासा: जन्म से पहले मौत के मुंह में जा रहे 1000 में से 22 शिशु

Mon, 07 Oct 2024 10:04 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 07 Oct 2024 10:04 AM IST
सार

 1000 में से 22 शिशु मौत के मुंह में जा रहे हैं। यह खुलासा हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय और महाराष्ट्र में किए गए अध्ययन में हुआ है।

विज्ञापन
Study reveals: 22 out of 1000 babies are dying before birth
शिशु(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जन्म से पहले ही लापरवाही से 1000 में से 22 शिशु मौत के मुंह में जा रहे हैं। यह खुलासा हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, मेघालय और महाराष्ट्र में किए गए अध्ययन में हुआ है। अध्ययन कुल 216 मृत शिशुओं पर किया गया।  इनकी मृत्यु की वजह में आयरन, फॉलिक एसिड की कमी, गर्भस्थ शिशु का विकास न होना जैसे कई कारण पाए गए। अध्ययन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा के विशेषज्ञों भी हिस्सा लिया।

विज्ञापन

विशेषज्ञों की इस टीम में डॉ. शकुंतला छाबड़ा, डॉ. गीतांजलि डेका, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. प्रणबिका महंता, डॉ. अंजलि रानी, डॉ. इंद्राणी रॉय, डॉ. अशोक वर्मा, डॉ. मनीषा नायर और अन्य शामिल रहे। अध्ययन में अक्तूबर 2018 से सितंबर 2023 के बीच जन्म देने वाली गर्भवती व प्रसूता महिलाएं शामिल की गईं। छह राज्यों के 13 अस्पतालों में भर्ती 9823 महिलाओं को शामिल किया गया, जिन्होंने बच्चों को जन्म दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

इनमें 216 बच्चे मृत अवस्था में जन्मे पाए गए। 48 प्रसव पूर्व और 168 प्रसव के दौरान प्राण छोड़ गए, जो प्रति 1000 पर 22 थे। इसके लिए कई जोखिम कारक थे।  जैसे चार से कम प्रसव पूर्व जांच करवाना, गर्भावस्था के दौरान कोई आयरन, फॉलिक एसिड अनुपूरक नहीं लेना, तीसरी तिमाही में गंभीर एनीमिया होना, गर्भावस्था व भ्रूण संबंधी जटिलताएं जैसे कि उच्च रक्तचाप संबंधी विकार होना, समय से पहले जन्म और कम वजन भी मृत अवस्था में जन्म के जोखिम में वृद्धि से जुड़े थे।

विज्ञापन

ऑक्सफोर्ड के विशेषज्ञों के साथ किया अध्ययन 
डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक वर्मा ने कहा है कि यह अध्ययन ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ किया गया है। जन्म के समय शिशुओं की मृत्यु के कारण ढूंढने के लिए इस संबंध में और भी अध्ययन किया जा रहा है, जिससे कि शिशुओं की इस तरह से होने वाली मृत्यु की दर को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि जन्म के समय शिशुओं की मृत्यु होने के कई कारण हैं। अगर आवश्यक एहतियात बरते जाएं तो इस दर को कम किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed