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राज्य ऋण संगोष्ठी: अगले साल हिमाचल को पांच फीसदी अतिरिक्त कर्ज देगा नाबार्ड

Wed, 09 Feb 2022 09:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 09 Feb 2022 09:03 PM IST
सार

 नाबार्ड ने 2022-23 के दौरान प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों के तहत राज्य में 29,172.00 करोड़ के ऋण प्रवाह की संभावना का आकलन किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.22 प्रतिशत अधिक है। नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय से वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन पीटरहॉफ शिमला में हुआ।

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State credit Seminar: NABARD will give five percent additional loan to Himachal next year
राज्य ऋण संगोष्ठी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने हिमाचल प्रदेश का नाबार्ड स्टेट फोकस पेपर 2022-23 और हिमाचल प्रदेश में नाबार्ड पुस्तिकाओं का विमोचन किया। नाबार्ड ने 2022-23 के दौरान प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में विभिन्न गतिविधियों के तहत राज्य में 29,172.00 करोड़ के ऋण प्रवाह की संभावना का आकलन किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5.22 प्रतिशत अधिक है। नाबार्ड हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय से वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए राज्य ऋण संगोष्ठी का आयोजन पीटरहॉफ शिमला में हुआ। संगोष्ठी समारोह का उद्घाटन कृषि, ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने किया। नाबार्ड के महाप्रबंधक डॉ. सुधांशु के मिश्रा, उप महाप्रबंधक आतिश आनंत, भारतीय रिजर्व बैंक के प्रभारी अधिकारी एसएस नेगी आदि भी मौजूद हुए। इस संगोष्ठी में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों, गैर सरकारी संगठनों के सदस्यों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पादक संगठनों आदि ने भाग लिया।

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डॉ. सुधांशु के मिश्रा ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए राज्य ऋण संगोष्ठी के महत्व और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य फोकस पेपर सभी जिलों के लिए तैयार पीएलपी की परिणति है। हर जिले की पीएलपी राज्य सरकार के संबंधित विभागों और जिले में कार्यरत बैंकों के परामर्श से उपलब्ध होना संभावित है। मुख्य अतिथि की ओर से जारी स्टेट फोकस पेपर 2022-23 सभी हितधारकों के लिए उनकी योजना और नीतियां बनाने के लिए उपयोगी दस्तावेज साबित होगा। इस वार्षिक प्रक्रिया का उद्देश्य कृषि उत्पादन में वृद्धि को बढ़ावा देना और ऋण सहायता के माध्यम से कृषि और गैर-कृषि क्षेत्र के तहत रोजगार के अवसर पैदा करना है। इस मौके पर कुछ किसानों और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना, पंजीयक सहकारी समितियां राजेश शर्मा, भारतीय रिजर्व बैंक से आतिश आनंत और एसएलबीसी से एसएस नेगी ने नाबार्ड को सफलतापूर्वक स्टेट फोकस पेपर तैयार करने और सेमिनार आयोजित करने के लिए बधाई दी।
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कृषि मंत्री ने बैंकरों को गरीब किसानों को लघु ऋण देने के लिए प्रोत्साहित किया
कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बैंकरों को गरीब किसानों को लघु ऋ ण देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने ग्रामीण विकास में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बाजार पर पकड़ बढ़ाने के लिए एसएचजी के उत्पादों की ब्रांडिंग की जाए। संगोष्ठी के दौरान राज्य में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), एसएचजी, बैंक शाखाओं, वाटरशेड और आदिवासी विकास के क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों को नाबार्ड द्वारा उनके कार्यों के लिए सम्मानित किया गया।

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