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अब बाजार में आएगी सोलन मिर्च, फायदे जानकर दंग रह जाएंगे

Tue, 11 Oct 2016 10:02 AM IST
अर्चना जनदेव/अमर उजाला, सोलन
अर्चना जनदेव/अमर उजाला, सोलन Updated Tue, 11 Oct 2016 10:02 AM IST
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Solan capsicum fight against cancer

शिमला मिर्च के बाद अब लोग जल्द ही सोलन मिर्च का स्वाद भी चख सकेंगे। सोलन स्थित बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी ने मशहूर शिमला मिर्च (केपस्किम) की एक नई वैराइटी ईजाद की है। औषधीय गुणों वाली इस किस्म को ‘सोलन भरपूर मिर्च’ नाम दिया गया है। यह मिर्च कैंसर के अलावा अनीमिया की कमी से जूझ रहे रोगियों के लिए भी लाभदायक होगी। 

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इससे लीवर दुरुस्त रहेगा और शरीर की त्वचा के डेड सेल को रिप्लेस करने में मदद मिलेगी। सेंटर रिलीज कमेटी ने इस प्रजाति को मंजूरी दे दी है। दिसंबर से जनवरी तक इसके बीज नौणी विवि में उपलब्ध होंगे। विवि के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस किस्म की मिर्च में कीटनाशकों का बहुत कम इस्तेमाल होगा। यह मिर्च अन्य से 20 दिन पहले तैयार होगी। 
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तोड़ने पर जल्द खराब भी नहीं होगी। इसमें पाए जाने वाले एंटी कार्सिनोजेनिक के कारण यह कैंसर रोगियों के लिए लाभदायक होगी। साथ ही पोटाशियम, कैलशियम, मैनिजियम के साथ विटामिन ए, ई और विटामिन सी का भी अच्छा स्रोत है। सालों के अनुसंधान के बाद नौणी विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग ने सोलन भरपूर शिमला मिर्च की ओपन पॉलीनेटिड वैराइटी तैयार की है। 
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वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। खून की कमी दूर होती है। इसमें इंडोल थ्री कारबोनाइट पाया जाता है। यह लीवर के रोगियों के लिए उपयोगी है। यह एंटी ऑक्सीडेंट का कार्य भी करता है। शरीर की त्वचा के डेड सेल को भी रिप्लेस करने में मदद करेगा। 

क्यों पड़ा शिमला मिर्च नाम

Solan capsicum fight against cancer

वनस्पति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एचएस कंवर ने कहा कि सोलन भरपूर मिर्च का रंग स्पार्कलिंग ग्रीनिश होगा। आम शिमला मिर्च से अधिक चमकीली और रसदार। एक हेक्टेयर भूमि में 500 ग्राम बीज की जरूरत होती है। यह बीज 2000 रुपये किलो नौणी विवि में उपलब्ध है। 

सोलन भरपूर मिर्च की पैदावार सोलन, शिमला, ठियोग और सिरमौर के कुछ क्षेत्रों में की जा रही है। इसे किचन गार्डन में भी उगाया जा सकता है। खुद किसान इसका बीज तैयार कर सकते हैं। इसकी खेती पॉली हाउस में भी की जा सकती है। विवि किसानों के लिए प्रशिक्षण शिविर लगा रहा है। 

पहली बार अंग्रेज 1819 में शिमला आए। वे अपने साथ इंग्लैंड से मिर्च का बीज लाए जिसे उन्होंने शिमला और सोलन में उगाया। यहां का मौसम इसके लिए अनुकूल था। इस मिर्च की पैदावार होने लगी। इसी मिर्च को अंग्रेजों ने शिमला मिर्च का नाम दिया जो अब देश भर में मशहूर है। 

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