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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shrikhand Mahadev Yatra: Mata Ambika and Swami Dattatreya's chadi yatra left for Shrikhand from Nirmand

Shrikhand Mahadev Yatra: निरमंड से माता अंबिका और स्वामी दतात्रेय की छड़ी यात्रा श्रीखंड रवाना

Thu, 18 Jul 2024 05:49 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, आनी (कुल्लू)
संवाद न्यूज एजेंसी, आनी (कुल्लू) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 18 Jul 2024 05:49 PM IST
सार

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा निरमंड से 29वीं छड़ी यात्रा रवाना हुई। देशभर से आए साधु-संतों के साथ स्थानीय लोगों सहित सौ श्रद्धालुओं का जत्था वीरवार को श्रीखंड रवाना हुआ। 

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Shrikhand Mahadev Yatra: Mata Ambika and Swami Dattatreya's chadi yatra left for Shrikhand from Nirmand
माता अंबिका और स्वामी दतात्रेय की छड़ी यात्रा श्रीखंड रवाना - फोटो : संवाद

विस्तार

 श्रीखंड महादेव के दर्शन करने के लिए श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा निरमंड से 29वीं छड़ी यात्रा रवाना हुई। देशभर से आए साधु-संतों के साथ स्थानीय लोगों सहित सौ श्रद्धालुओं का जत्था वीरवार को श्रीखंड रवाना हुआ। श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा निरमंड में साधु-संतों का कमेटी की ओर से भव्य स्वागत किया गया। हवन यज्ञ और पूजा-अर्चना के बाद भोले के जयकारों से निरमंड नगरी गूंज उठी। साधु-संत माता अंबिका और दतात्रेय स्वामी की छड़ी यात्रा के साथ श्रीखंड महादेव के दर्शन करने के लिए रवाना हुए।

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माता अंबिका के कारदार पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि इस बार 29वीं छड़ी यात्रा ने दशनामी जूना अखाड़ा के प्रमुख दावत गिरि महाराज (फलाहारी बाबा) की अगुवाई में प्रस्थान किया, जिसमें छड़ी यात्रा के प्रधान टकेश्वर शर्मा अपने पदाधिकारियों सहित मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि बीते दिन 17 जुलाई को देवशयनी एकादशी के दिन छड़ी मंंदिर से निकालकर जूना अखाड़ा में लाई गई। यहां से 18 जुलाई को विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत श्रीखंड महादेव के लिए रवाना हुई। यात्रा का पहला विश्राम ब्राहटी नाला में होगा। दूसरे दिन थाचडु, तीसरे दिन भीम ड़वारी, जबकि 21 जुलाई को गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा-अर्चना और दर्शन करने के उपरांत लौटेगी। लौटने पर यहां विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

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देवढांक गुफा से है शिव भगवान का गहरा संबंध
रामपुर से निरमंड के मध्य स्थित भगवान शिव की अति प्राचीन गुफा देवढांक से शिव का बेहद प्राचीन संबंध है। कहते हैं कि जब भगवान शिव ने भस्मासुर को वरदान दिया था कि वे जिसके भी सिर पर हाथ रखेगा, वह भस्म हो जाएगा। वरदान मिलने के उपरांत जब भस्मासुर के मन में कुविचार आया कि क्यों न वरदान को सच साबित करने के लिए वे पहले भगवान शिव पर ही इसका प्रयोग करें। कहते हैं कि उस समय भगवान शिव इसी देवढांक गुफा में छिपे थे, जिसकी आज भी बहुत मान्यता है। अंबिका माता के कारदार पुष्पेंद्र शर्मा ने बताया कि श्रीखंड यात्रा से पूर्व जो देवढांक गुफा और माता अंबिका के दर्शन करता है, उसकी यात्रा सफल मानी जाती है।

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