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शांता कुमार का एलान: विवेकानंद अस्पताल में खुलेगा शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के नाम नर्सिंग कॉलेज

Sat, 14 May 2022 08:37 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा)
संवाद न्यूज एजेंसी, पालमपुर (कांगड़ा) Published by: Krishan Singh Updated Sat, 14 May 2022 08:37 PM IST
सार

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि विवेकानंद मेडिकल अस्पताल में जल्द नर्सिंग कॉलेज खोला जाएगा। यह कॉलेज कारगिल युद्ध के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के नाम पर खोला जाएगा। इसके लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है। 

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Shanta Kumar's announcement: Nursing college will open in the name of martyr Captain Saurabh Kalia in Vivekananda Hospital
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि विवेकानंद मेडिकल अस्पताल में जल्द नर्सिंग कॉलेज खोला जाएगा। यह कॉलेज कारगिल युद्ध के शहीद कैप्टन सौरभ कालिया के नाम पर खोला जाएगा। इसके लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है। औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। विवेकानंद अस्पताल के दस साल पूरे होने पर शांता ने कहा कि यह अस्पताल लोगों के सहयोग से बनाया गया है। इसमें इलाके के लोगों की आस्था जुड़ी है। यह जनता और सरकार के सहयोग से बेहतर कार्य कर रहा है। पालमपुर में विवेकानंद ट्रस्ट में एक बड़ा अस्पताल चलाना उनका एक बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट था। 15 नवंबर, 1992 में इसका शिलान्यास किया था। इसके लिए 90 लाख रुपये इकट्ठा कर उन्होंने इस अस्पताल को बनाने की बात दिल्ली के अपोलो अस्पताल से की।

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इसके लिए दस करोड़ रुपये मांगा था और दो साल में पालमपुर में बड़ा अस्पताल बनाने की बात कही थी। दुर्भाग्य से छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस में उनकी हिमाचल में भाजपा की सरकार चली गई। इससे यह सपना अधूरा दिखने लगा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और प्रयास जारी रखे। उन्होंने जनता के सहयोग से अस्पताल बनाने का फैसला किया। जनता के सहयोग से इसके लिए 23 करोड़ रुपये जुटाए। इसमें सात करोड़ हिमाचल तो 16 करोड़ बाहरी लोगों से इकट्ठा किए। उसके बाद यह अस्पताल बनाया गया। कहा कि आज यह अस्पताल बेहतर कार्य कर रहा है। इस मौके पर अस्पताल के प्रमुख डा. विमल दुबे, रविंद्र शर्मा, सचिव नरेश आचार्य मौजूद रहे।
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वीरभद्र ने दिया था बड़ा सहयोग : शांता
शांता ने कहा कि 1992 में उनकी सरकार जाने के बाद वह अस्पताल की जमीन को लेकर वीरभद्र से मिले थे। उन्होंने कहा था कि वह इस जमीन को किसी ओर को न दें। जिला कांगड़ा के कांग्रेस के अधिकतर नेता इसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने वीरभद्र सिंह पर भी दबाव डाला था, लेकिन वीरभद्र सिंह ने कहा कि उनका वादा है कि वह इस जमीन को किसी को नहीं देंगे। आज उस जमीन पर ही यह अस्पताल बना है।

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