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Shimla News: नीट पेपर लीक के विरोध में एसएफआई की हड़ताल जारी
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चार दिन से भूख हड़ताल पर हैं कार्यकर्ता
डीवाईएफआई, सीटू ने भी किया एसएफआई का समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग को लेकर शिमला उपायुक्त कार्यालय के बाहर एसएफआई की क्रमिक भूख हड़ताल वीरवार को भी जारी रही।
वहीं वीरवार को विभिन्न छात्र, युवा और जनसंगठनों के प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर पहुंचे और समर्थन जताया। चौथे दिन एसएफआई के अरुण, अंजली भगत, तिजेंदर, दिया और उपेंद्र क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। संगठन ने कहा कि नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। आंदोलन को डीवाईएफआई, सीटू, हिमाचल किसान सभा (एचकेएस), अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), डीएसएमएम, एसएनएस और एसयूएस समेत कई संगठनों ने समर्थन दिया। इन संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने और छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलनों की सुरक्षा की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार है, व्यापार नहीं।
एसएफआई ने कहा कि 22 जुलाई को भूख हड़ताल के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हुए विवाद के बाद छात्राओं ने सदर थाना शिमला में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कई लोगों के नाम दर्ज करते हुए मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं। एसएफआई ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज की भी निंदा की। एसएफआई ने कहा कि देशभर में परीक्षा घोटालों और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं के खिलाफ छात्र एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को भंग करने, नई शिक्षा नीति वापस लेने और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग फिर दोहराई। संगठन ने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, शिमला में क्रमिक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।
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डीवाईएफआई, सीटू ने भी किया एसएफआई का समर्थन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। नीट पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने की मांग को लेकर शिमला उपायुक्त कार्यालय के बाहर एसएफआई की क्रमिक भूख हड़ताल वीरवार को भी जारी रही।
वहीं वीरवार को विभिन्न छात्र, युवा और जनसंगठनों के प्रतिनिधि आंदोलन स्थल पर पहुंचे और समर्थन जताया। चौथे दिन एसएफआई के अरुण, अंजली भगत, तिजेंदर, दिया और उपेंद्र क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे। संगठन ने कहा कि नीट पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और शिक्षा के बढ़ते निजीकरण के खिलाफ आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता। आंदोलन को डीवाईएफआई, सीटू, हिमाचल किसान सभा (एचकेएस), अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति (एडवा), डीएसएमएम, एसएनएस और एसयूएस समेत कई संगठनों ने समर्थन दिया। इन संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने, सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने और छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलनों की सुरक्षा की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने डीसी कार्यालय के बाहर नारेबाजी करते हुए कहा कि शिक्षा अधिकार है, व्यापार नहीं।
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एसएफआई ने कहा कि 22 जुलाई को भूख हड़ताल के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ हुए विवाद के बाद छात्राओं ने सदर थाना शिमला में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में कई लोगों के नाम दर्ज करते हुए मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए हैं। एसएफआई ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए कथित पुलिस लाठीचार्ज की भी निंदा की। एसएफआई ने कहा कि देशभर में परीक्षा घोटालों और शिक्षा व्यवस्था में बढ़ती अनियमितताओं के खिलाफ छात्र एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को भंग करने, नई शिक्षा नीति वापस लेने और सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग फिर दोहराई। संगठन ने कहा कि जब तक इन मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, शिमला में क्रमिक भूख हड़ताल और आंदोलन जारी रहेगा।
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