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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sexual Harassment Case: Relief to Praveer from High Court, ICC will not proceed with the investigation at present

यौन उत्पीड़न मामला: प्रवीर को हाईकोर्ट से राहत, फिलहाल जांच आगे नहीं बढ़ाएगी आईसीसी

Fri, 25 Jun 2021 09:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 25 Jun 2021 09:00 AM IST
सार

राजधानी शिमला में तैनात एक महिला हेड कांस्टेबल ने बीते 13 मई को महिला थाने में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया था। अब कोई से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को राहत मिली है।

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Sexual Harassment Case: Relief to Praveer from High Court, ICC will not proceed with the investigation at present
कोर्ट(सांकेतिक)

विस्तार

महिला पुलिस कर्मी के यौन उत्पीड़न के आरोप में फंसे अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रवीर ठाकुर को हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से राहत मिली है। सरकार ने हाईकोर्ट में ठाकुर की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय मांगा। साथ ही कोर्ट को अवगत कराया है कि जवाब दाखिल करने तक कार्यस्थल पर शारीरिक शोषण एक्ट के तहत गठित आंतरिक  शिकायत कमेटी (आईसीसी) जांच को आगे नहीं बढ़ाएगी। कोर्ट ने इसके बाद मामले की अगली सुनवाई तय कर दी है। हालांकि, पुलिस की ओर से दर्ज मामले की जांच जारी रहेगी। 

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राजधानी शिमला में तैनात एक महिला हेड कांस्टेबल ने बीते 13 मई को महिला थाने में जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के खिलाफ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न का मामला दर्ज करवाया था। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पर ही महिला पुलिस कर्मियों के साथ कार्य स्थल पर किसी भी तरह के उत्पीड़न की शिकायत की जांच करने का जिम्मा था। आरोप है कि अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने कार्यालय में भी पीडि़त हेड कांस्टेबल का शारीरिक उत्पीड़न किया।
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गंभीर आरोप के चलते आरोपी पुलिस अफसर को शिमला पुलिस के अहम पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में अटैच कर दिया गया। इसके बाद पुलिस के साथ राज्य स्तरीय कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकथाम कमेटी को भी विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए। एडिशनल एसपी ने कार्यस्थल पर शारीरिक शोषण एक्ट के तहत गठित कमेटी की जांच पर सवाल उठाए थे। कहा था कि मामले की जांच उनके नियोक्ता द्वारा निर्धारित कंडक्ट रूल्स के अनुसार नहीं हो रही है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था।

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