हिमाचल: सीएम को लेकर बंटे भाजपाई, शांता ने कार्यकर्ताओं को लगाई फटकार
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हिमाचल विधानसभा चुनाव में 68 में से 44 सीटें हासिल करने वाली भाजपा को अपना सीएम तलाशने में काफी माथापच्ची करनी पड़ रही है। नतीजे घोषित होने के बाद पांच दिन से पार्टी में लगातार घमासान जारी है। शुक्रवार को होटल पीटरहॉफ के बाहर पर्यवेक्षकों रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और नरेंद्र तोमर की मौजूदगी में धूमल-जयराम समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की।
हंगामे के बीच दूसरे दिन भी पर्यवेक्षकों ने वरिष्ठ विधायकों और सांसदों की राय जानी। सभी की राय जानने के बाद पर्यवेक्षक और प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय दोपहर बाद करीब एक बजे दिल्ली लौट गए। भाजपा हाईकमान अब जल्द ही सीएम के नाम का एलान कर सकता है।
पर्यवेक्षकों ने शुक्रवार सुबह सांसद शांता कुमार, वीरेंद्र कश्यप और रामस्वरूप शर्मा का पक्ष जाना। सांसद अनुराग ठाकुर यहां नहीं पहुंचे। सूत्रों के अनुसार शांता और रामस्वरूप जीते विधायकों से सीएम चुने जाने के पक्ष में हैं। कश्यप ने हाईकमान की सहमति में अपनी सहमति जताई है।
बोर्ड की बैठक के बाद होगा फैसला
पर्यवेक्षकों से बैठक के बाद शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने सीएम पर अपनी राय दे दी है। अब केंद्रीय हाईकमान फैसला करेगा। शांता ने कहा कि सीएम को लेकर जनता ने अपना फैसला दे दिया है। जनता का रुझान किस तरफ है, वह भी पता चल चुका है।
उल्लेखनीय है कि राजधानी में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल खेमा दो दिन तक उनको सीएम बनाने का दबाव बनाता रहा। इस दौरान मंडी के सिराज से विधायक जयराम ठाकुर के पक्ष में माहौल बनता दिखा।
हालांकि, जेपी नड्डा के समर्थन में भी कुछ विधायकों ने अपनी राय दी है। प्रदेश प्रभारी मंगल पांडेय ने साफ किया कि पर्यवेक्षक राय जानने आए थे।
उन्होंने सबकी भावनाएं और दलीलें रिपोर्ट में दर्ज की हैं जिसे केंद्रीय संसदीय बोर्ड के समक्ष रखा जाएगा। अब बोर्ड की बैठक के बाद मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी।
मैं अध्यक्ष होता तो नारेबाजी करने वालों को पार्टी से निकाल देता
पर्यवेक्षकों के साथ वार्ता के लिए शिमला पहुंचे सांसद शांता कुमार ने पीटरहॉफ के बाहर धूमल-जयराम समर्थकों की नारेबाजी पर कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों के सामने समर्थक नारेबाजी करते रहे।
यह अनुशासनहीनता है। शांता ने कहा - मैं प्रदेश अध्यक्ष होता तो नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ताओं को पार्टी से निकाल देता। बता दें कि शांता जब बैठक के लिए पहुंचे, उस समय समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए दोनों पर्यवेक्षकों को घेर रखा था।
आरएसएस दफ्तर भी गए पर्यवेक्षक
सांसदों से बैठक करने से पहले दोनों पर्यवेक्षक, प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती नाभा स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यालय गए। वहां प्रांत संचालक संजीवन से उन्होंने मुलाकात की।
इस मुलाकात को सीएम के नाम पर संघ की राय लेने से जोड़कर देखा जा रहा है। संघ में मजबूत पृष्ठभूमि के चलते संघ भी जयराम के पक्ष में बताया जा रहा है।
25 दिसंबर को तय नहीं शपथ ग्रहण समारोह
नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख पर प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा कि 25 दिसंबर को शपथ ग्रहण अभी तय नहीं हुआ है। सीएम के नाम की घोषणा होने के बाद ही शपथ ग्रहण का कार्यक्रम जारी होगा।
संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद तिथि तय हो जाएगी। नारेबाजी पर सत्ती ने कहा कि व्यक्ति विशेष के नारे लगाना सही नहीं है। मेरा मानना है कि नेता के साथ लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं।
सीएम का पद बहुत बड़ा होता है। लोग चाहते हैं कि उनका नेता आगे आए, इसलिए कुछ भावुक कार्यकर्ता इस तरह नारेबाजी कर देते हैं।