अनुच्छेद 370 हटने से अब हिमाचल में निकला धारा 118 का जिन्न
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जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म करने के बाद हिमाचल में धारा 118 का जिन्न फिर से बाहर निकल आया है। प्रदेश में गैर हिमाचलियों के लिए जमीन खरीद की अनुमति नहीं होने पर सवाल उठाए जाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी जमकर बहस छिड़ गई है। नेताओं में बयानबाजी तेज हो गई है। हिमाचल में कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का स्वागत किया, मगर साथ ही आशंका जाहिर की कि इसके बाद हिमाचल में धारा 118 से भी छेड़छाड़ हो सकती है। इस पर भाजपा सरकार के मंत्री सुरेश भारद्वाज ने सफाई दी कि ऐसा कुछ नहीं होगा।
ऐसी आशंका गलत है। अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले पर संसद में हुई चर्चा के दौरान असरुद्दीन ओवेसी ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि वह कब हिमाचल में कृषि संपत्ति ले सकेंगे। सरकार पूरे उत्तर-पूर्व को कारपोरेट सेक्टर को देने जा रही है। पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह बादल ने भी पिछले दिनों हिमाचल में जमीन खरीद के लिए धारा 118 में छूट देने की वकालत की। इसकी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने निंदा की है। सोशल मीडिया पर भी इस बारे में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।
गैर हिमाचली धारा 118 की मंजूरी के बाद ही खरीद सकते हैं जमीन
हिमाचल में कृषि भूमि की खरीद गैर कृषक नहीं कर सकते हैं। गैर हिमाचली भी यहां जमीन नहीं खरीद सकते हैं। गैर हिमाचलियों को जमीन लेनी हो तो इस पर राज्य मंत्रिमंडल ही फैसला ले सकता है। राज्य मंत्रिमंडल से हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू सुधार अधिनियम 1972 की धारा 118 के तहत मंजूरी मिलने के बाद ही यहां जमीन ली जा सकती है। इसके लिए भी वाजिब कारण स्पष्ट करने होते हैं। उद्योग लगाने के लिए भी निजी जमीन लेनी हो तो भी धारा 118 की मंजूरी लेनी होती है।
118 से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे : विक्रमादित्य
शिमला ग्रामीण से विधायक विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35 ए को हटाने के बाद अब प्रदेश के भू अधिनियम की धारा 118 को खत्म करने पर चर्चा हो रही है। धारा 118 से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले विधानसभा सत्र में कांग्रेस इसको लेकर प्रस्ताव लाएगी। उन्होंने सत्ताधारी दल के विधायकों से भी मांग की कि वे राजनीतिक दल से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का समर्थन करें।
यदि केंद्र सरकार इस धारा को लेकर कोई प्रस्ताव लाती है, उसका विरोध किया जाएगा। प्रदेश के किसानों के हकों और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के धारा 118 को लेकर दिए गए बयान का स्वागत किया। साथ ही कहा कि पंजाब के पूर्व उप मुख्यमंत्री भी इस धारा को समाप्त करने की मांग कर रहे हैं। कहा कि धारा 118 को सुरक्षित बनाया जाना चाहिए।