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250 करोड़ का छात्रवृत्ति घोटाला: एक हजार फर्जी दाखिले दिखाकर हड़पा 11 करोड़ का वजीफा
Sat, 18 Jul 2020 10:37 AM IST
Krishan Singh
देवेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
देवेंद्र ठाकुर, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 18 Jul 2020 10:37 AM IST
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सीबीआई ने 250 करोड़ रुपये के छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खोलने शुरू कर दी हैं। केसी ग्रुप नवांशहर की जांच में खुलासा हुआ है कि संस्थान ने चार सालों में करीब 1000 फर्जी दाखिले दिखाकर करीब 11 करोड़ रुपये की राशि हड़प ली है।
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केंद्रीय जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की पड़ताल और लंबी पूछताछ में पाया है कि संस्थान, शिक्षा विभाग के अधिकारी और बैंक ने मिलकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया। वर्ष 2013 से लेकर 2017 के बीच संस्थान में पढ़ाई करने के नाम पर करीब 1200 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया था। जांच के दौरान इसमें एक हजार आवेदन फर्जी पाए गए हैं।
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सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक संस्थान ने करोड़ों की छात्रवृत्ति हड़पने के लिए निजी कंप्यूटर सेंटरों से बच्चों के दस्तावेज हासिल किए और उन्हीं के नाम पर विभिन्न योजनाओं के तहत मिलने वाली छात्रवृत्ति हड़प ली। ज्यादातर विद्यार्थियों को भी पता नहीं है कि दस्तावेजों में उन्होंने कई डिग्रियां हासिल कर ली हैं। ऐसे कंप्यूटर सेंटरों पर भी केंद्रीय जांच एजेंसी शिकंजा कस रही है।
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इसमें पता लगाया जा रहा है कि दस्तावेज मुहैया करवाने में उन्होंने कितने पैसों का लेन-देन किया। यही वजह है कि सीबीआई की टीम मामले में मुख्य आरोपी शिक्षा विभाग के अधीक्षक अरविंद राज्टा समेत संस्थान के वाइस चेयरमैन हितेश गांधी और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शाखा नवांशहर के कैशियर एसपी सिंह से एक बार फिर पूछताछ के लिए कैथू जेल पहुंची थी। सीबीआई अभी तक इस मामले में शिक्षा विभाग, बैंक और निजी संस्थान के प्रबंधकों समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर चुकी है।