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युवाओं को काबिल बनाने वाले संस्थान ही निकम्मे

Sat, 30 Aug 2014 01:02 PM IST
Updated Sat, 30 Aug 2014 01:02 PM IST
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scam in skills development Allowance scheme

हिमाचल सरकार की महत्वकांक्षी ‘‘कौशल विकास भत्ता योजना’’ में भत्ता पाने और दिलाने के नाम पर ‘घपले’ की बू आ रही है। वर्ष 2013 में जिन निजी संस्थानों से प्रशिक्षण लेकर कई बेरोजगारों ने महीनों तक कौशल विकास भत्ता लिया, उनमें से अधिकतर संस्थान सरकार के पैरामीटर पूरे नहीं कर पा रहे हैं।

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अंदेशा है कि नाम के लिए खुले इन संस्थानों में तकनीकी शिक्षा हासिल करने वाले बेरोजगार युवाओं के विकास भत्ते पर संकट के बदल मंडरा गए हैं। उपमंडल स्तर पर बनी कमेटी के निरीक्षण में यह खुलासा हुआ है।
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वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालते ही कौशल विकास भत्ता योजना आरंभ की। योजना के तहत सरकारी एवं निजी संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे बेरोजगार युवाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये का भत्ता मिल रहा है।
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पिछले साल बिलासपुर जिले में तीन हजार से अधिक युवाओं को भत्ता मिला। लेकिन, दिसंबर महीने में सरकार ने नई अधिसूचना जारी करते हुए निजी संस्थानों का निरीक्षण करने के लिए उपायुक्त को कमेटियां बनाने के आदेश दिए।

उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला और एसडीएम की अध्यक्षता में उपमंडल स्तर पर कमेटियां बनीं। इन दिनों यह कमेटियां ऐसे संस्थानों का निरीक्षण कर रही है।

संस्‍थानों के लिए तय किए गए हैं पैरामीटर

scam in skills development Allowance scheme

बिलासपुर सदर उपमंडल में निरीक्षण का कार्य लगभग पूरा कर लिया गया है। इसमें कई खामियां उजागर हुई हैं। सूत्र बताते हैं कि कमेटी ने जो रिपोर्ट बनाई है उसमें कई संस्थान सरकार के पैरामीटर को पूरा नहीं कर पा रहे।

इधर, इस वर्ष रोजगार विभाग ने अभी तक निजी संस्थानों में प्रशिक्षण लेने वालों के आवेदन ही नहीं लिए हैं। निरीक्षण के बाद जिन संस्थानों को मान्यता दी जाएगी, उसी में प्रशिक्षण लेने वालों के आवेदन लिए जाएंगे।

नियमानुसार संस्थान, आर्गेनाइजेशन, एनजीओ के लिए पैरामीटर बनाए गए हैं। इन के तहत संस्थान की अपनी भूमि-भवन होना चाहिए। इसके अलावा जो प्रशिक्षण दे रहे हैं उसकी मशीनरी, फैकल्टी, मान्यता, एफिलिएशन एवं परीक्षा के फार्मूले आदि शामिल हैं।

एसडीएम सदर डा. एमएल मेहता के मुताबिक सदर खंड में निजी संस्थानों का निरीक्षण लगभग पूरा कर लिया गया है। कमेटी में जिला रोजगार अधिकारी, बीडीओ सदर, आईटीआई के प्रधानाचार्य शामिल हैं।

निरीक्षण में कई खामियां पाई गई हैं। कई संस्थानों ने अपनी कई शाखाएं खोली हैं। कहीं सुविधाएं नहीं। कई तो कागजों में ही खुले हैं। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिला उपायुक्त को भेज दी है।

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