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संयुक्त किसान मंच: अल्टीमेटम की अवधि पूरी, बातचीत के लिए सरकार ने नहीं बुलाए बागवान

Sun, 12 Sep 2021 06:15 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sun, 12 Sep 2021 06:15 PM IST
सार

सरकार की अनदेखी से नाराज बागवान सोमवार को शिमला, ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, नारकंडा, रामपुर, कुल्लू, आनी और करसोग में प्रदर्शन करेंगे। 

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sanyukt kisan manch will protest on monday in himachal pradesh
मंच के संयोजक हरीश चौहान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बागवानों को मंडियों में सेब के सही दाम न मिलने और संकट के समय में सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये के खिलाफ संयुक्त किसान मंच सोमवार को उपमंडल स्तर पर प्रदर्शन करेगा। बीते 30 अगस्त को शिमला के कालीबाड़ी हाल में मंच ने सेब सीजन के दौरान पेश आ रही समस्याओं को लेकर बागवानों के साथ 10 दिन के भीतर बैठक बुलाने की मांग की थी। समस्याएं हल न होने की स्थिति में सरकार को उपमंडल स्तर पर प्रदर्शन के लिए चेताया गया था।

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अल्टीमेटम की अवधि पूरी हो गई है लेकिन सरकार ने न तो बागवानों के साथ बैठक की है और न ही समस्याएं हल हुई हैं। सरकार की अनदेखी से नाराज बागवान सोमवार को शिमला, ठियोग, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, नारकंडा, रामपुर, कुल्लू, आनी और करसोग में प्रदर्शन करेंगे। एसडीएम और तहसीलदारों को ज्ञापन भी सौंपेंगे। आगामी रणनीति का भी एलान किया जाएगा। संघ ने प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में बागवानों के जुटने का दावा किया है। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान का कहना है कि मंच एक गैर राजनीतिक संगठन है जिसे 22 से अधिक किसान-बागवान संगठनों का समर्थन मिल चुका है।
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32 साल बाद प्रदेश के किसान-बागवान एक मंच पर इकट्ठा हुए हैं। आंदोलन के लिए 32 सदस्यीय समिति गठित की गई है। मंडियों में सेब के रेट गिरने से बागवानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। कारपोरेट कंपनियों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। पहले चरण में शिमला, कुल्लू, किन्नौर, मंडी जिला के सेब उत्पादकों की लड़ाई लड़ी जा रही है। दूसरे चरण में प्रदेश के अन्य जिलों के किसानों के मुद्दे भी जोरशोर से उठाए जाएंगे।
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ये हैं बागवानों की मांगें
मंडी मध्यस्थता योजना के तहत ए, बी, सी ग्रेड सेब 60, 44 और 24 रुपये प्रति किलो खरीदा जाए।
परदे में सेब की बोली बंद कर खुली बोली की व्यवस्था की जाए। बागवानों से मनमानी काट बंद हो।
आढ़तियों और लदानियों के पास बकाया पैसे का तुरंत भुगतान हो, जिस दिन माल बिके उसी दिन भुगतान हो।
सेब की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले कार्टन और ट्रे की बढ़ी कीमतें वापस हों।
प्राकृतिक आपदा से सेब की फसल को हुए नुकसान का तुरंत मुआवजा दिया जाए।
बढ़ती महंगाई और मालभाड़े की बढ़ी दरें वापस ली जाएं। एपीएमसी के चेक पोस्ट पर अवैध वसूली बंद हो।
सभी मंडियों में वजन के हिसाब से सेब सहित अन्य फसलें बेचने की व्यवस्था लागू हो।
एचपीएमसी, हिमफेड द्वारा बीते सालों में खरीदे सेब के पैसे का तुरंत भुगतान किया जाए।
खाद, बीज, कीटनाशक, फफूंदीनाशक दवाओं पर सब्सिडी बहाल की जाए।
कृषि बागवानी के उपकरणों एंटी हेलनेट, स्प्रेयर, टिलर की सब्सिडी तुरंत जारी की जाए।

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