Drug Alert: हिमाचल में बनीं 24 दवाओं के सैंपल फेल, बाजार ने स्टॉक वापस मंगवाया
प्रदेश में बनी 24 दवाएं मानकों पर सही नहीं पाई गई हैं। अक्तूबर के ड्रग अलर्ट में देशभर में 61 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा हिमाचल में इस बार सैंपल फेल हुए हैं।
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हिमाचल प्रदेश में बनी 24 दवाएं मानकों पर सही नहीं पाई गई हैं। अक्तूबर के ड्रग अलर्ट में देशभर में 61 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इसमें सबसे ज्यादा हिमाचल में इस बार सैंपल फेल हुए हैं। बद्दी एफी पेरेंटल कंपनी के छह, समयन कंपनी के तीन व हिल्लर कंपनी के दो सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। बैक्टीरियल संक्रमण, फंगल इंफेक्शन, एंटीबायोटिक्स, कैंसर, बुखार, विटामिन डी, बीपी, पोषक तत्व की कमी की दवा, इंफेक्शन, बलगम, एंटी फंगल, दर्द निवारक व अल्सर की दवाई के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। अक्तूबर में केंद्रीय औषधि नियंत्रण संगठन ने 1,105 दवाओं के सैंपल लिए थे, जिनमें 1044 सैंपल पास हुए हैं। सिरमौर जिले की तीन व सोलन की 21 दवा कंपनियों के सैंपल ठीक नहीं निकले।
सोलन के वाकनाघाट स्थित कंपनी सॉफ्ट टच, किशनपुरा की बनसाई फार्मा, एफी पेरेंटल, उपकार फार्मास्युटिकल, एलवी लाइफ साइंस, हिल्लर लैब, हेल्थ बायोटेक, मेडीलाइफ हेल्थ साइंस, समयन हेल्थ केयर, सिंबोसिस फार्मास्युटिकल, डीएम फार्मा, सार बायोटेक, स्कोटो एडिल फार्मा, फार्मास्युटिकल हेल्थ केयर, एरियोन हेल्थ केयर, मकेस्टार बायोजेनेटिक, एस्पो फार्मास्युटिकल कंपनी के सैंपल मानकों पर सही नहीं पाए गए हैं। राज्य ड्रग नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया कि जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए विभाग ने उनके लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। बाजार ने स्टाॅक को वापस लाने के लिए कहा है।
दवाओं के सैंपल फेल होने पर हो सख्त सजा : शांता
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि शर्मनाक और चिंताजनक बात है कि सोलन और सिरमौर की 19 दवा कंपनियों की बनाई 24 दवाइयां गुणवत्ता में फेल हो गईं। यह इसलिए चिंताजनक है कि सालों से लगातार इस प्रकार के समाचार आते रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को याद रखना चाहिए कि कानून का पालन डर के बिना नहीं हो सकता। इन दवाइयों के कारण कई बार कई देशों में कई लोगों की मौत भी हुई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस अपराध के लिए इतनी सख्त सजा दी जाए कि दोबारा किसी को अपराध करने की हिम्मत न हो।
उन्होंने कहा कि भारत को दवाई उद्योग में विश्व की फार्मेसी कहा जाता है। भारत में बनने वाली दवाओं में करीब 40 प्रतिशत हिमाचल में निर्मित होती हैं। सौभाग्य से इसी हिमाचल में स्वास्थ्य संस्थाओं में काम आने वाले उपकरण बनाने के लिए कई हजार करोड़ का बल्क ड्रग पार्क स्थापित हो रहा है। लेकिन हिमाचल की कंपनियों की ओर से लगातार खराब दवाइयां बनाने के कारण प्रदेश की बदनामी हो रही है। यह एक गंभीर संकट है।
शांता ने कहा कि बल्क ड्रक पार्क के कारण हिमाचल को जो महत्व मिल रहा है उसे इस प्रकार की दवाइयों से बड़ी ठेस लग रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि दवा कंपनियों को सजा का डर नहीं है। जो पकड़े जाते हैं कुछ दिन के बाद उनको दोबारा लाइसेंस मिल जाता है।