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डायरिया से बचाएगी रोटा वायरस वैक्सीन की पांच बूंदे
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 24 Feb 2016 08:24 PM IST
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हिमाचल के बच्चों में डायरिया की रोकथाम और डायरिया से लड़ने की क्षमता विकसित करने के लिए मार्च महीने से रोटा वायरस वैक्सीन की पांच बूंदे पिलाई जाएंगी। हिमाचल के सभी जिलों में वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। बच्चों के 6, 10 और 14 हफ्ते का होने पर रोटा वायरस वैक्सीन दी जाएगी।
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हिमाचल के अलावा हरियाणा, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश में भी यह अभियान शुरू होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस वैक्सीनेशन के लिए पहले चरण में देश के 4 राज्यों को चुना है। वैक्सीनेशन से छोटे बच्चों की डायरिया से मौत होने के मामलों में कमी आने का दावा किया गया है। कांगड़ा जिले में दिसंबर 2015 में इस अभियान को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था।
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हिमाचल के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है। केंद्र सरकार ने डायरिया की रोकथाम के लिए देश भर के चार राज्यों में नवजात बच्चों के वैक्सीन शेड्यूल में रोटा वायरस वैक्सीन को शामिल किया है। इसका जिम्मा नेशनल हेल्थ मिशन को दिया गया है।
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हिमाचल, हरियाणा, उड़ीसा और आंध्रप्रदेश में डायरिया से मरने वाले नवजात बच्चों की संख्या अधिक होने के चलते इन चार राज्यों को चुना गया है। नेशनल हेल्थ मिशन के डायरेक्टर हिमाचल हंसराज शर्मा ने बताया कि देश में डायरिया से हर साल डेढ़ लाख बच्चों की मौत हो जाती है।
चार राज्यों में रोटा वायरस वैक्सीन अभियान की सफलता के बाद इसे अन्य राज्यों में नवजात बच्चों को जन्म से नौ माह तक दी जाने वाली वैक्सीन में शामिल किया जाएगा। अभी नवजात बच्चों को नौ माह तक जो वैक्सीन दी जाती है, उसमें आठ तरह की बीमारी कवर होती हैं। अब नौवीं बीमारी डायरिया के लिए रोटा वायरस वैक्सीन दी जाएगी। बच्चों को दवा मुफ्त में पिलाई जाएगी।
पोलियो के लिए बन रहा इंजेक्शन- पोलियो की रोकथाम के लिए 0 से 5 साल तक के बच्चों को दो बूंद दी जाती है। अब पिलाने वाली दवा के साथ-साथ केंद्र सरकार पोलियो के इंजेक्शन को भी शुरू करने जा रही है। पोलियो की दो बूंद पिलाने की प्रक्रिया को भी बंद नहीं किया जाएगा।
वैक्सीनेशन का अभी यह है शेड्यूल- बच्चों को जन्म पर पोलियो की ड्राप्स के साथ बीसीजी हेपेटाइटिस बी का टीका लगाया जाता है। इसके बाद डेढ़ माह, ढाई माह, साढ़े तीन माह पर बच्चे को पोलियो ड्राप्स समेत पांच बीमारियों की रोकथाम के टीके लगते हैं।
इनमें गलघोंटू, काली खांसी, टेटनेस, निमोनिया, पीलिया शामिल है। नौवें माह में खसरे का टीका लगता है। इस तरह नेशनल वैक्सीन शेड्यूल में 8 बीमारी कवर होती हैं। अब नौंवी वैक्सीन रोटा वायरस के रूप में डेढ़, ढाई और साढ़े तीन महीने के अंतराल में दी जाने वाली पेंटावायलेट शेड्यूल में दी जाएगी।