1700 करोड़ में बन रही टनल, साल भर कराएगी बर्फ का दीदार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नौ किलोमीटर लंबी रोहतांग टनल दो साल में बनकर तैयार हो जाएगी। बीआरओ ने 2017 तक इस सुरंग के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इस पर करीब 1700 करोड़ खर्च आएगा। निर्माण में जुटे इंजीनियर और अधिकारी भी इसके तय समय पर पूरा होने का दावा कर रहे हैं। अभी तक दोनों छोर से करीब पौने पांच किलोमीटर खुदाई का कार्य हो चुका है। टनल बनने से रोहतांग के रास्ते से लाहौल-पांगी और लेह की दूरी भी करीब 46 किलोमीटर कम हो जाएगी।
रक्षा मंत्रालय भी टनल को लेकर गंभीर है। दिल्ली से बीआरओ के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आरएम मित्तल ने रोहतांग टनल के निर्माण का जायजा लिया और काम में तेजी लाने के निर्देश दिए। टनल बनने से भारतीय सेना और लाहौल-पांगी घाटी के लोग छह माह तक बर्फ में कैद नहीं रहेंगे। भारी बर्फबारी में भी सैलानी जब चाहे तब लेह तक पहुंच सकेंगे। सेना भी इस रास्ते से रसद और गोला बारूद पहुंचा सकेगी।
'2017 तक किसी भी सूरत में पूरा करेंगे निर्माण'
रोहतांग टनल के प्रमुख कमांडर एस. राव का कहना है कि उनका पूरा प्रयास है कि रोहतांग टनल को 2017 तक किसी भी सूरत में बनाया जाए। रोहतांग टनल का निर्माण कार्य 28 जून 2010 में शुरू हुआ था और इसे पूरा करने का लक्ष्य 2015 रखा गया था। सोनिया गांधी ने इसका नींव पत्थर रखा था। बीआरओ का दावा है कि यह 2017 तक हर हाल में पूरा हो जाएगा।
लगातार पानी के रिसाव हो रही देरी- टनल निर्माण के दौरान लूज रॉक आने और पानी का अधिक रिसाव होने से बीआरओ को काम करने में परेशानी हो रही है। बीआरओ के अधिकारियों के अनुसार 2012 के बाद लगातार पानी का रिसाव बढ़ रहा है। टनल में तीन मिलियन लीटर पानी का प्रतिदिन रिसाव होता है।
46 लोगों की हो चुकी है मौत- आठ अगस्त, 2013 को बादल फटने से कगड़ी नाले में बाढ़ आने से रोहतांग टनल के लिए बने मार्ग को नुकसान हुआ था। इस हादसे में 46 मजदूर पानी में बह गए थे।