चीन के बढ़ते दखल पर केंद्र ने लिया फैसला, अब ऐसे बनेंगी सड़कें
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सामरिक महत्व के मनाली-लेह और तांदी-संसारी मार्ग का निर्माण कार्य अब निजी कंपनियां करेंगी। रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब ग्लोबल टेंडर किए जा रहे हैं। इसकी देखरेख सीमा सड़क संगठन के पास ही रहेगी। बीआरओ ने कंसल्टेंट नियुक्त कर दिए हैं। अब जल्द ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
बता दें कि सीमांत सड़कों का निर्माण अभी तक बीआरओ ही करता आ रहा है, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने निजी कंपनियों को जिम्मा सौंपने का फैसला लिया है। अभी तक टारिंग का काम ही निजी कंपनियों को दिया जाता था। अब कटिंग, पुल बनाने, कलवर्ट और सुरक्षा दीवार आदि सभी तरह के कार्य भी निजी कंपनियों को दिए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सीमांत इलाकों में चीन बेहद तेजी से व्यवस्थागत ढांचे को विकसित कर रहा है। लिहाजा, रक्षा मंत्रालय ने बीआरओ के अधीन सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी लाने को चरणबद्ध तरीके से निजी कंपनियों को देने का फैसला लिया है।
पहले दिया जाता था टारिंग का ही काम
रक्षा मंत्रालय के फैसले के बाद बीआरओ के दीपक प्रोजेक्ट के तहत मनाली-लेह सामरिक मार्ग के आरडी 13 से 31 और आरडी 185 से 195 तक का हिस्सा निजी कंपनियों को दिया जा रहा है। तांदी-संसारी सड़क के 59 किमी हिस्से के भी टेंडर आवंटित किए जा रहे हैं।
बीआरओ के अतिरिक्त महादिनेशक ब्रिगेडियर मोहन लाल ने बताया कि कंसल्टेंसी का काम पूरा करने के बाद चरणबद्ध तरीके से सड़कों के निर्माण कार्य के निजी कंपनियों को टेंडर दिए जाएंगे।
निजी कंपनियों को पहले केवल टारिंग का ही काम सौंपा जाता था, लेकिन अब कटिंग, पुल बनाने समेत सारा काम दिया जा रहा है। बीआरओ निर्माण की देखरेख करेगा।
भारत-चीन सीमा तक डबल लेन सड़क का काम तेज
मोहन मेहता, ज्यूरी (रामपुर बुशहर)। चीन की चुनौतियों के जवाब में भारत ने भी चीन सीमा तक पक्की और चौड़ी सड़कों का निर्माण तेज कर दिया है। हिमाचल के लाहौल स्पीति में 13500 फीट की ऊंचाई पर कौरिक से सटी भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा तक डबल लेन सड़क का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। यह सड़क साल में ज्यादातर समय बर्फ से ढकी रहती है। लेकिन अब सामरिक महत्व को देखते हुए इसे पक्का और डबल लेन किया जा रहा है।
बीआरओ का अमला चट्टानें काटकर विस्तारीकरण कार्य में जुटा हुआ है। सड़क तैयार होने पर सेना किसी भी आपात स्थिति में चीन सीमा पर आसानी से मोर्चा संभाल सकेगी। सामरिक महत्व के अलावा इस इलाके का पर्यटन की दृष्टि से भी खासा महत्व है। ऐसे में देश-विदेश के पर्यटकों की भी आवाजाही बढ़ सकेगी। किन्नौर के पोवारी से लाहौल स्पीति के कौरिक, शुगर सेक्टर तक 131 किलोमीटर लंबी सड़क को प्रोजेक्ट दीपक के माध्यम से क्रियान्वित किया जा रहा है।
759 बीआरटीएफ ज्यूरी और 108 सड़क निर्माण इकाई पोवारी की टीमें सड़क विस्तारीकरण कर रही हैं। प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए वर्ष 2018-19 में ही करीब 105 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस सड़क के 74 किलोमीटर भाग को चौड़ा और पक्का किया जा चुका है जबकि शेष हिस्से में कार्य चल रहा है। क्षेत्र में समदो, काजा, लोसर सड़क मार्ग को पक्का किया जा रहा है। इसके अलावा मालिंग नाले से हो रही समस्या के समाधान, हूर्लिंग से मुरंग सड़क, लोसर- कुंजुम पास से छोटा दर्रा की सड़कों को भी दुरुस्त करने में ताकत झोंकी गई है।
उधर, 759 बीआरटीएफ के कमांडर राजीव कुमार अधीक्षण अभियंता सिविल ने बताया कि बीआरओ के जवान चीन सीमा तक सड़क को चौड़ा और पक्का करवाने में लगे हैं। प्रोजेक्ट दीपक के चीफ इंजीनियर मोहन लाल के दिशा निर्देशों पर 108 सड़क निर्माण इकाई के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार आनंद की टीम इस काम को समय से पूरा करने में जुटी हुई है।