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हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है संशोधित बिजली विधेयक

Tue, 08 Jan 2019 05:14 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Tue, 08 Jan 2019 05:14 PM IST
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revised power bill is not in the interest of Himachal Pradesh

राज्य बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन ने मंगलवार को राष्ट्रीय बिजली कर्मचारी एवं अभियंताओं की समन्वय समिति के आह्वान पर बिजली कानून संशोधन विधेयक 2018 के खिलाफ  प्रदेश भर में प्रदर्शन किए।

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बिजली बोर्ड के मंडल व वृत्त स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। राजधानी शिमला स्थित बिजली बोर्ड मुख्यालय कुमार हाउस में भी जोरदार प्रदर्शन किया गया।
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इस अवसर पर यूनियन के प्रदेश महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली संशोधन कानून 2018 को संसद के शीतकालीन सत्र में पारित होने के लिए लाया जा रहा है।
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इस संशोधन कानून के प्रभाव में आने से बोर्ड विघटित होकर सभी कार्यों को अलग-अलग करने के साथ वितरण के कार्य को छोटी-छोटी कंपनियों में बांटा जाना तय है।

प्रदेश की भूगौलिक परिस्थितियों को देखते हुए दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की लागत औद्योगिक क्षेत्र की तुलना में काफी ज्यादा है, जिसे अभी विद्युत दरें तय करते समय सब्सिडी से कम किया जा रहा है। लेकिन कानून पारित हो जाने से दूरदराज क्षेत्र में बिजली दरें आपूर्ति के हिसाब से तय होंगी।

ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा अतिरिक्त बोझ

revised power bill is not in the interest of Himachal Pradesh

इससे ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पडे़गा। बिजली मापने के लिए जगह-जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों और बिजली के फीड़रो के अलग-अलग करने का खर्चा भी उपभोक्ताओं को वहन करना पडेगा।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक व अन्य राजस्व वाले क्षेत्र निजी हाथों मे चले जाएंगे। इसका भी सीधा असर प्रदेश के घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। जहां बडे़ उपभोक्ताओं को उनकी सुविधा अनुसार बिजली मिलेगी वहीं अन्य उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति में दी जा रही सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित होंगी और

विद्युत दरें बढे़गी। महासचिव हीरालाल वर्मा ने कहा कि बिजली बोर्ड के विघटित होकर निजी हाथों में जाने से जहां कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित होंगी वहीं बोर्ड पेंशनरों व कर्मचारियों की पेंशन व सेवानिवृत्ति पर मिलने बाले वित्तीय लाभ जैसी समाजिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

इस अवसर पर देवेंद्र शर्मा, सितेंद्र वर्मा, रोशन कुमार, भोपेद्र शर्मा, बच्चन नेगी, ज्ञान चद, अशोक भारद्वाज, ओपी जस्टा सहित कई अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।

इन मांगों को लेकर भी उठाई आवाज

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- उत्तराखंड की तर्ज पर कर्मचारियों की संख्या को कम करने को गठित कमेटियां रद्द की जाएं।
- 48 श्रेणी के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए।
- बोर्ड में ऑउटसोर्स पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए स्थाई नीति बनाई जाए। 
- लंबित करुणामूलक के मामलों को निपटाया जाए।
- बोर्ड में मानव रहित विद्युत उपकेंद्रों के लिए 350 पदों का सृजन किया जाए।

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