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घर वैध करवाने को सिर्फ इतना समय, जल्दी करें

Wed, 10 Sep 2014 08:23 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/ अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 10 Sep 2014 08:23 PM IST
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revised notification issued by the government for illegal houses

हिमाचल के तीस हजार अवैध भवन मालिकों को राज्य सरकार ने बड़ी राहत दी है। इन्हें घर को वैध कराने के लिए सरकार ने लगभग डेढ़ महीने का वक्त दिया है। सरकार ने बुधवार को संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है।

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कहा गया है कि नगर और ग्राम योजना संशोधन अध्यादेश के तहत अवैध भवनों को वैध करने के लिए लोगों से आवेदन मंगाने की तारीख 10 सितंबर से गिनी जाएगी। 45 दिन तक यह आवेदन जमा किए जाएंगे।  
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बुधवार को सचिवालय में बैठक कर घरों को वैध करने में बेहद सतर्कता बरने के निर्देश भी दिए गए। कहा गया कि अध्यादेश का खुद से अर्थ न निकाला जाए, जिससे भविष्य में किसी स्तर पर अड़चन खड़ी हो जाए।
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इसके लिए सचिव टाउन एवं कंट्री प्लानिंग आरडी नजीम ने प्रदेश भर के टीसपी कर्मचारियों, अधिकारियों, ड्राफ्टमैन और आर्किटेक्ट को विस्तार से समझाया।  

नजीम ने कहा कि अध्यादेश में हर पहलू की विस्तार से जानकारी दी गई है। उसे केवल समझने की जरूरत है। खासतौर पर भवनों का नक्शा बनाने वाले ड्राफ्टमैन और आर्किटेक्ट को इस पर विशेष फोकस करने की जरूरत है।

उन्होंने बताया कि तय फार्मूले के तहत ही किसी भी भवन का संशोधित मानचित्र बनाया जाए। ऐसा नहीं है कि आवेदन जमा करने के साथ ही अवैध भवन का मानचित्र पास समझा जाएगा।

उन्होंने कहा कि संशोधित मानचित्र जमा करने के बाद एक साल के भीतर टीसीपी की टीम की ओर से जमा किए गए संशोधित मानचित्र और मौके का मिलान किया जाएगा।

इस दौरान अगर मिलान में गड़बड़ी पाई गई तो उस भवन को वैध कर पाना मुश्किल होगा। इसलिए जरूरी है कि हर स्तर पर सतर्कता बरती जाए। यह ध्यान रहे कि अवैध कब्जे की जमीन पर किसी भी सूरत में मानचित्र पास नहीं किया जाएगा।

आवेदन के साथ क्या चाहिए
सभी दिशाओं से भवन का फोटो प्रमाण पत्र, आवेदक का शपथ पत्र, जमीन के कागजात की प्रति आर्किटेक्ट से भवन का नक्शा प्रमाणित, आवेदन शुल्क एक हजार रुपये, भवन मानचित्र की तीन प्रतियां, संबंधित विभागों की एनओसी, मूल ततीमा की एक प्रति आवासीय भवनों को नियमित करने का शुल्क


10 फीसदी तक अनाधिकृत भवनों के लिए नियम में पहले से ही प्रावधान है। 10 से 20 प्रतिशत तक अनाधिकृत  भवनों के लिए  1000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 20 से 40 प्रतिशत तक 2000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 40 से 60 प्रतिशत तक अनाधिकृत, 3000 रुपये प्रति वर्ग मीटर, 60 से 70 प्रतिशत तक अनाधिकृत,  4000 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से भुगतान करना होगा।

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