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आईआईटी मंडी का शोध: प्लास्टिक को हाइड्रोजन और उपयोगी उत्पादों में बदलना होगा आसान

Wed, 23 Mar 2022 11:43 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी
संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Wed, 23 Mar 2022 11:43 PM IST
सार

 आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक सक्षम फोटोकैटलिस्ट (प्रकाशिक उत्प्रेरक) का विकास किया है। इससे केवल प्लास्टिक का ही ट्रीटमेंट नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों के कचरे और अन्य बायोमास को फोटोरिफॉर्म करना और पानी के प्रदूषकों को विघटित करना भी संभव होगा। 

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Research of IIT Mandi: It will be easy to convert plastic into hydrogen and useful products
आईआईटी मंडी के प्रोफेसर डॉ. प्रेम फेक्सिल सिरिल - फोटो : संवाद

विस्तार

प्लास्टिक को अब हाइड्रोजन और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदलना आसान हो जाएगा। आईआईटी मंडी के शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक सक्षम फोटोकैटलिस्ट (प्रकाशिक उत्प्रेरक) का विकास किया है। इससे केवल प्लास्टिक का ही ट्रीटमेंट नहीं बल्कि खाद्य पदार्थों के कचरे और अन्य बायोमास को फोटोरिफॉर्म करना और पानी के प्रदूषकों को विघटित करना भी संभव होगा। प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए आईआईटी मंडी के शोधकर्ता प्लास्टिक को उपयोगी रसायनों में बदलने की विशेष विधियां विकसित कर रहे हैं। शोधकर्ताओं ने एक संवाहक पॉलीमर- पॉलीपायरोल के माध्यम से फोटोकैटलिस्ट को नैनो पार्टिकल (एक बाल के व्यास से सौ हजार गुना बारीक कण) के रूप में आयरन ऑक्साइड के साथ संयोजन किया है। शोधकर्ताओं ने देखा कि पाइरोल के साथ आयरन ऑक्साइड नैनो कणों के संयोजन से एक सेमीकंडक्टर हेट्रोजंक्शन बन गया।

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इसके परिणामस्वरूप प्रकाश से प्रेरित फोटोकैटलिटिक गतिविधि नजर आई। फोटोकैटलिस्ट को सक्रिय करने के लिए आम तौर पर यूवी प्रकाश चाहिए और इसलिए विशेष बल्बों की आवश्यकता पड़ती है। आईआईटी मंडी का कैटलिस्ट सूरज की रोशनी में अपना काम कर सकता है। शोधकर्ताओं ने चार घंटों के अंदर 100 प्रतिशत डिग्रेडेशन देखा, जब उपयोग किए गए कैटलिस्ट में आयरन ऑक्साइड का लगभग 4 प्रतिशत भार पॉलीपायरोल मैट्रिक्स में मौजूद था। इसके बाद शोधकर्ताओं ने इस कैटलिस्ट का परीक्षण पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) पर किया, जो खाद्य पदार्थ, वस्त्र, चिकित्सा सामग्री और सौंदर्य प्रसाधन की पैकेजिंग में काफी उपयोग होने वाला प्लास्टिक है।
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टीम ने देखा कि कैटलिस्ट के दृश्य प्रकाश में होने पर पीएलए के विघटन से हाइड्रोजन उत्पन्न हुआ। कैटलिस्ट कठिन या असंभव प्रतिक्रियाओं को अंजाम देने वाले पदार्थ हैं और प्रकाश से सक्रिय होने पर उन्हें फोटोकैटलिस्ट कहा जाता है। मुख्य शोधकर्ता डॉ. प्रेम फेलिक्स सिरिल ने बताया कि हाइड्रोजन का बनना अपने-आप में बहुत अच्छा है, पर हम कार्बन डाईऑक्साइड उत्पन्न न होने से और भी उत्साहित हैं। प्लास्टिक से हाइड्रोजन बनाने के लिए विकसित अधिकतर अन्य फोटोकैटलिस्ट बाई-प्रोडक्ट में ग्रीनहाउस गैस उत्पन्न करते हैं, लेकिन आईआईटी मंडी के कैटलिस्ट ने ऐसा नहीं किया बल्कि उपयोगी रसायन जैसे लैक्टिक एसिड, फॉर्मिक एसिड और एसिटिक एसिड का सह-उत्पादन किया।
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इन शोधकर्ताओं ने किया काम 
इस शोध का वित्तीयन शिक्षा मंत्रालय की शिक्षा एवं शोध संवर्धन योजना (स्पार्क) के तहत किया गया था। शोध के निष्कर्ष हाल में जर्नल ऑफ एनवायरनमेंटल केमिकल इंजीनियरिंग में प्रकाशित किए गए। शोध का नेतृत्व डॉ. प्रेम फेक्सिल सिरिल प्रोफेसर स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज आईआईटी मंडी और डॉ. अदिति हालदार, एसोसिएट प्रोफेसर स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज आईआईटी मंडी ने किया। इसमें उनकी पीएचडी विद्वान रितुपर्णो गोगोई, आस्था सिंह, वेदश्री मुतम, ललिता शर्मा, काजल शर्मा ने सहयोग दिया।

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