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घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को महंगी बिजली का झटका लगने के आसार कम

Sat, 07 Mar 2020 02:01 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 07 Mar 2020 02:01 PM IST
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Relief for domestic consumers of Himachal Pradesh as Power Tariff may not hike in state
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

प्रदेश के लाखों घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं को इस साल महंगी बिजली का झटका लगने के आसार कम हो गए हैं। साल 2020-21 के लिए सरकार ने सस्ती बिजली देने के लिए बोर्ड को 480 करोड़ की सब्सिडी देने की घोषणा की है। इसी माह बिजली की नई दरें तय होने की संभावना है। बोर्ड ने 487 करोड़ के घाटे का हवाला देते हुए 8.73 फीसदी की दर से बिजली महंगी करने का विद्युत नियामक आयोग को प्रस्ताव भेजा है।

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अब 480 करोड़ की सब्सिडी मिलने से बोर्ड के मनमाफिक दरें बढ़ने की संभावना कम है। बीते साल सरकार ने बोर्ड को 475 करोड़ की सब्सिडी दी थी। इस दौरान आयोग ने मात्र पांच पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली महंगी की थी। उधर, प्रदेश में लंबे समय से लटकी जल विद्युत परियोजनाओं को जल्द पूरा कर शुरू कराने के उद्देश्य से परियोजना निर्माताओं को एकमुश्त रियायत देने के लिए नीति तैयार की जाएगी।
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मुख्यमंत्री ने कहा नीति का निर्माण ऐसे किया जाएगा ताकि इन परियोजनाओं के निर्माण कार्य को गति मिल सके। प्रदेश में विद्युत उत्पादन में तेजी लाने और गैर परंपरागत ऊर्जा के समग्र विकास के लिए सरकार तीन हजार 200 करोड़ की परियोजना को भारत सरकार ने वित्त पोषण कराने के लिए अनुमति दे दी है।

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इस परियोजना के तहत विश्व बैंक द्वारा विद्युत उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण क्षेत्रों में निवेश के माध्यम से प्रदेश के दूरदराज के इलाकों में बिजली समस्या का समाधान किया जा सकेगा। 6947 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 40 मेगावाट की रेणुकाजी परियोजना इस वित्त वर्ष में शुरू हो जाएगी। पांगी घाटी में बिजली की समस्या को कम करने के लिए नए वित्त वर्ष में एक हजार घरों में 250 वाट क्षमता के ऑफ ग्रिड सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।

गैर परंपरागत ऊर्जा क्षेत्र में रिन्यूबल पर्चेज ऑब्लिगेशन (आरपीओ) को पूरा करने के लिए हिमाचल प्रदेश के स्थानीय निवासियों को सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए 250 से 500 किलोवाट तक की परियोजनाएं आवंटित की है। सरकार ने इन परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली को खरीदने के लिए बिजली बोर्ड के साथ क्रय अनुबंध करना अनिवार्य किया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं के जल्द क्रियान्वयन के लिए 2000 रुपये प्रति किलोवाट का उपदान दिया जाएगा। आठ ईएचटी परियोजनाओं कोठीपुरा (एम्स), नडूखर, नीरथ, दुधली (शिमला), मोगीनंद, कसौली, वाकनाघाट और चकवां खन्नी औद्योगिक पार्क में विद्युतीकरण एवं प्रणाली सुधार/संवर्धन से संबंधित 65 हाई/लो वोल्टेज परियोजनाओं का कार्यान्वयन प्रस्तावित है।

515 मेगावाट की परियोजनाएं होंगी शुरू

मुख्यमंत्री ने बताया कि नए वित्त वर्ष में 515 मेगावाट क्षमता की परियोजनाएं चालू होने की संभावना है। इनमें 180 मेगावाट की बजोली होली, 24 मेगावाट की वांगर होमते, 100 मेगावाट की सोरंग और हिमाचल प्रदेश पावर कारपोरेशन की 111 मेगावाट क्षमता की सावरा कुड्डू शामिल हैं।

इसके अलावा 100 की ऊहल परियोजना को भी मई महीने तक चालू कर दिया जाएगा। वहीं, 210 मेगावाट की लूहरी चरण एक, 66 मेगावाट की धौलासिद्ध, 48 मेगावाट की चांजू तृतीय चरण और 30 मेगावाट की दियोथल चांजू के कार्य आरंभ हो जाएंगे।

लो वोल्टेज की समस्या से मिलेगी निजात
प्रदेश के दुर्गम इलाकों में कम वोल्टेज की समस्या से नए वित्त वर्ष में निजात मिल जाएगी। बिजली बोर्ड ने कम वोल्टेज वाले क्षेत्रों की पहचान कर 158 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की है जो इसी साल के अंत तक पूरी हो जाएगी।

इसके अलावा 65 हजार लकड़ी के बिजली के खंभों को बदला जाएगा। विद्युत संचार निगम द्वारा पावर ट्रांसमिशन नेटवर्क में 820 एमवीए क्षमता के 6 सब स्टेशन और 200 सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइनों को जोड़े जाने का लक्ष्य है। इन परियोजनाओं के निर्माण पर 350 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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