पांच साल पूरा करने वाले अनुबंध शिक्षकों को राहत
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश में कमीशन के माध्यम से कार्यरत अनुबंध अध्यापकों को नियमितीकरण के समय दोबारा से मेडिकल और चरित्र प्रमाणपत्र नहीं देना होगा। पांच साल का सेवाकाल पूरा करने वाले अनुबंध अध्यापकों ने सरकार ने यह बड़ी राहत दी है। राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विरेंद्र चौहान और हिमाचल प्रदेश अनुबंध अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र वर्मा की अगुवाई में
बीते दिन एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मामले को लेकर अतिरिक्त मुख्य सचिव शिक्षा पीसी धीमान से मुलाकात की। विरेंद्र चौहान ने बताया कि पीसी धीमान ने आश्वस्त किया है कि इस बार से मेडिकल और चरित्र प्रमाणपत्र देने में छूट दी जाएगी। शिक्षक संघों के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त मुख्य सचिव को बताया कि अनुबंध कर्मचारियों की नियुक्ति नियमित प्रक्रिया के समान लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ चयन बोर्ड द्वारा होती है।
नियमितीकरण की प्रक्रिया से 31 मार्च की शर्त को हटाने की मांग
नियमितीकरण के समय दोबारा दस्तावेज की प्रक्रिया में छूट मिलनी चाहिए। प्रतिनिधिमंडल ने अनुबंध अध्यापकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया को भी जल्द शुरू करने की मांग की। विरेंद्र चौहान और सुरेंद्र वर्मा ने बताया कि बीते साल नियमितीकरण की प्रक्रिया 31 मार्च के बाद जुलाई और अगस्त तक चली थी। 31 मार्च 2015 को पहले ही कई अनुबंध अध्यापकों के लगभग साढे़ पांच वर्ष का सेवाकाल पूरा हो चुका था।
शिक्षक संघ ने मांग की है कि नियमितीकरण की प्रक्रिया से 31 मार्च की शर्त को पूरी तरह हटा दिया जाए। पांच वर्ष सेवाकाल पूरा करने वाले अनुबंध अध्यापकों को नियमित किया जाए। महंगाई भत्ता भी दिऐ जाने की मांग को विभाग की ओर से बजट में शामिल कराया जाए। टीजीटी से पीजीटी आईपी की पदोन्नति भी जल्द करने की मांग की गई।