पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल सरकार ने लिया ये फैसला
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हिमाचल की जनता ने हमेशा देसी नस्ल की गाय पर विश्वास जताया है। इसके चलते सरकार पशुपालन के लिए विभिन्न तरह की योजनाओं पर काम कर रही है।
पशुपालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने यह जानकारी जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर स्थित शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान व तकनीक विश्वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) क्षेत्रीय समिति की ओर से आयोजित बैठक में दी।
उत्तराखंड पशुपालन निदेशक ने बैठक में आश्वस्त किया कि एक माह के भीतर 4500 लीटर से अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य वाले लाल सिंधी नस्ल के बैलों के वीर्य की 45000 डोज की आपूर्ति की जाएगी।
मरीनों नस्ल की 200 भेड़ें आयात की जाएंगी
कहा कि प्रदेश की गायों की संख्या को स्तरोन्नत करने के लिए पालमपुर स्थित वीर्य केंद्र के लिए कुछ समय में बैलों की आपूर्ति भी की जाएगी। वीरेंद्र कंवर ने पशुचारे की कमी की समस्या से निपटने के लिए चौधरी सरवन कुमार कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के कुलपति को संयोजित आहार खंड बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय भेड़ प्रजनन फार्मों में अंत प्रजनन की समस्या से निपटने के लिए जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड की ओर से 40 मेढ़े और प्रदेश के लिए रैनबोयलेट व मरीनों नस्ल की 200 भेड़ें आयात की जाएंगी।