फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rare Himalayan Brown Bears Spotted in Rakcham Chitkul Wildlife Sanctuary Video:

Himachal: रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में दिखा दुर्लभ हिमालयी भूरा भालू, देखें खूबसूरत वीडियो

Thu, 14 May 2026 04:56 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला / रिकांगपिओ।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला / रिकांगपिओ। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 14 May 2026 04:56 PM IST
सार

 किन्नाैर जिले के रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में हिमालयी भूरे भालू की दुर्लभ मौजूदगी दर्ज की गई है।

विज्ञापन
Rare Himalayan Brown Bears Spotted in Rakcham Chitkul Wildlife Sanctuary Video:
दुर्लभ हिमालयी भूरे भालू। - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के किन्नाैर जिले के रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य में हिमालयी भूरे भालू की दुर्लभ मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में यहां एक मादा भालू और उसके दो शावकों की तस्वीरें कैमरे में कैद हुई हैं। इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस अभयारण्य में दूसरी बार भूरे भालू की माैजूदगी दर्ज की है। इससे पहले वर्ष वर्ष 2016-17 में भी यहां हिमालयी भूरे भालू का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था।

विज्ञापन



 

पहली बार मादा भालू अपने दो शावकों के साथ दिखाई दी

ब्लॉक फाॅरेस्ट ऑफिसर (बीएफओ) संतोष ठाकुर ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भी हिमालयी भूरे भालू देखे गए हैं, लेकिन पहली बार मादा भालू अपने दो शावकों के साथ साफ तस्वीरों में दिखाई दी है। इससे पता चलता है कि अभयारण्य का वातावरण इस प्रजाति के लिए सुरक्षित और अनुकूल है। हिमालयी भूरा भालू हिमालयी पर्वतीय क्षेत्रों के सबसे बड़े स्तनधारी जीवों में माना जाता है। यह सर्वाहारी प्रजाति है, जो वनस्पतियों, जड़ों, कीटों और छोटे जीवों तक विभिन्न प्रकार के भोजन पर निर्भर रहती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार इसकी सूंघने की क्षमता अत्यंत तीव्र होती है और यह कई किलोमीटर दूर तक गंध पहचान सकता है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

जैव विविधता संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है प्रजाति

उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में बीजों के प्रसार के माध्यम से यह प्रजाति जैव विविधता संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। पक्षी विशेषज्ञ गैरी भट्टी के मुताबिक, लाहौल के बाद अब रकछम-छितकुल क्षेत्र हिमालयी भूरे भालुओं के लिए प्राकृतिक आवास बनकर उभर रहा है। इससे प्रकृति पर्यटन, पक्षी अवलोकन और वन्यजीव फोटोग्राफी को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। वन्यजीव मंडल सराहन के उप वन संरक्षक अशोक नेगी ने बताया कि इससे पहले वर्ष 2016-17 में भी यहां हिमालयी भूरे भालू का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। उन्होंने वन विभाग की टीम के संरक्षण कार्यों की सराहना की।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed