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सबूतों के अभाव में दुष्कर्म का आरोपी बरी

Wed, 06 Jan 2016 11:48 AM IST
Updated Wed, 06 Jan 2016 11:48 AM IST
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rape accused acquitted due to lack of evidence.

हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में दुष्कर्म के आरोपी को बरी कर दिया है। आरोपी पर नाबालिग का अपहरण और साक्ष्य मिटाने के भी आरोप थे। सत्र न्यायाधीश बिलासपुर ने आरोपी को रेप के जुर्म में सात वर्ष के कठोर कारावास और बीस हजार रुपये हर्जाने की सजा सुनाई थी। आरोपी संजय कुमार ने निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने उसे तमाम आरोपों से बरी कर दिया।

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पीड़िता के बयान के अनुसार आरोपी उसी के गांव का होने के नाते उससे परिचित था। 30 मार्च 2012 को वह परिवार के साथ बिलासपुर के सोहरा बिउंस गांव में श्रीनयना देवी मंदिर में भागवत कथा सुनने गई थी।
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उस समय उसकी उम्र करीब 14 साल थी। आरोपी ने दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसे फोन कर मंदिर के गेट के पास बुलाया और कार में बैठने को कहा। आरोपी ने कहा कि वह उसे प्यार करता है और शादी करना चाहता है।

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जबरन कार में बैठाकर ले गया आरोपी

rape accused acquitted due to lack of evidence.

उसने प्रस्ताव ठुकरा दिया और कार से बाहर आने की कोशिश की। आरोपी ने धमकी देकर उसे शोर करने से मना किया और गाड़ी दौड़ा दी। शाम करीब 9 से 10 बजे के बीच आरोपी ने बताया कि वे रामपुर पहुंच गए हैं। उसी रात रामपुर के एक गांव थैली चकटी में रेप किया। पुलिस स्टेशन बरमाणा में मामला दर्ज किया गया। एक अप्रैल को मामले में साक्ष्य मिटाने के अन्य आरोपी चमन शुक्ला ने पीड़िता को पुलिस स्टेशन रामपुर में यह कह कर पेश किया कि पीड़िता उसे नारकंडा में 30 मार्च को घूमती हुई मिली।

दयावश वह उसे अपने घर ले गया। रामपुर पुलिस ने मामले की रिपोर्ट पुलिस स्टेशन बरमाणा को दी। छानबीन कर आरोपी पर रेप और अपहरण का केस दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष ने 24 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने 4 दिसंबर, 2013 को आरोपी को सात साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।

नहीं साबित हुआ, वारदात के समय कहां था आरोपी

rape accused acquitted due to lack of evidence.

आरोपी की अपील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि मामले की छानबीन सही ढंग से नहीं हुई। मेडिकल रिपोर्ट में रेप की संभावनाओं से इंकार नहीं किया गया, लेकिन अभियोजन पक्ष साबित नहीं कर सका कि वारदात के समय आरोपी नयनादेवी और थैली चकटी में मौजूद था। यह भी साबित नहीं कर पाया कि पीड़िता के वस्त्र पर पाए गए सीमेन आरोपी के ही हैं।

पुलिस ने न तो डीएनए टेस्ट करवाया न ही आरोपी की मौजूदगी साबित करने को मोबाइल टॉवर की लोकेशन जांची। अहम लोगों के बयान भी दर्ज नहीं किए। मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि संभवतया पीड़िता से रेप हुआ होगा, लेकिन किसने किया इसका उत्तर अभियोजन पक्ष आज तक नहीं दे पाया।

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