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हिमाचल में धरातल पर नहीं उतरीं रेल परियोजनाएं

Wed, 24 Feb 2016 09:57 AM IST
Updated Wed, 24 Feb 2016 09:57 AM IST
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railway projects in himachal pradesh.

हिमाचल में प्रस्तावित रेल परियोजनाएं फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई हैं। सूबे से जुड़े न सामरिक महत्त्व के प्रोजेक्ट धरातल पर उतरे हैं और न ही औद्योगिक महत्त्व के। मनाली-लेह रेल लाइन अभी हवा में ही है। चंडीगढ़ बद्दी रेल लाइन का भी काम शुरू नहीं हो सका है।

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सालों से लटकी बिलासपुर-भानुपल्ली रेललाइन भी अभी तक भूमि अधिग्रहण के पेच में फंसी है। भले ही रेल बजट में हर बार हिमाचल को विभिन्न लाइनों के नाम पर सर्वे का झुनझुना थमा दिया जाता है, लेकिन जमीन पर बजट की घोषणाएं कहीं नहीं दिख रही हैं।
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2015-16 में मिला करोड़ों का बजट पर नहीं हुआ काम- वित्त वर्ष 2015-16 में 26 फरवरी को केंद्रीय रेल मंत्री की ओर से पेश किए गए रेल बजट में भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन के लिए 160 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया। नंगल-तलवाड़ा रेललाइन को 100 करोड़ का बजट घोषित किया गया।
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चंडीगढ़-बद्दी रेललाइन को 95 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा हुई। ऊना-हमीरपुर रेललाइन का सर्वेक्षण एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया गया। इसी तरह से ऊना-अंब के बीच 25 किलोमीटर लंबी रेललाइन को भी मंजूरी दी गई।

प्रदेश की तीन रेल लाइनों के लिए पहली बार 355 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इतने बड़े बजट का पहली बार प्रावधान किया गया, मगर इस बजट व्यवस्था के बावजूद अभी इनका काम बहुत सुस्ती से हो रहा है।

वित्त वर्ष 2013-14 के रेल बजट में महज 14 करोड़ का प्रावधान

railway projects in himachal pradesh.

वित्त वर्ष 2014-15 में रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने तो हिमाचल को काफी निराश किया। उनके बजट भाषण में तो हिमाचल का कहीं जिक्र तक नहीं आया। वित्त वर्ष 2013-14 के रेल बजट में तो तीन रेललाइनों के लिए महज 14 करोड़ रुपये के ही बजट का प्रावधान किया गया था। इनमें भी नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन को सबसे ज्यादा 10 करोड़ रुपये मिले थे।

ये लाइन अब तक 45 किलोमीटर लंबी ही बनी है। इसका 38 किलोमीटर बनना बाकी है। इसी साल चंडीगढ़ को बद्दी से जोड़ने के लिए एक लाख रुपये का टोकन बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा बिलासपुर-बद्दी-बेरी रेललाइन के लिए चार करोड़ रुपये रखे गए हैं।

घनौली से देहरादून वाया कालाअंब, पांवटा साहिब रेल मार्ग का काफी समय पहले सर्वे भी हो चुका है, मगर इसका आज तक बजट नहीं आया। लंबित अन्य योजनाओं की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में नंगल-तलवाड़ा रेल लाइन को पुरानी घोषणा के अनुरूप अभी 38 किलोमीटर बनाया जाना बाकी है, पर ये आगे नहीं बढ़ रही।

कालका से परवाणू ब्राडगेज लाइन की घोषणा पर भी अमल नहीं-
अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री रहते हुए कालका से परवाणू तक ब्राडगेज लाइन बिछाने की घोषणा हुई थी। एक दशक से अधिक समय बाद भी इस पर अमल नहीं किया गया है। पिछले साल के बजट में ऊना-हमीरपुर रेललाइन का सर्वेक्षण एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य भी तय किया गया। ये भी पूरा नहीं हो सका है।

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