बीबीएमबी मामला: हिमाचल को मिलेगा हक, पढ़िए क्या बोले पंजाब के वित्त मंत्री
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पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत बादल ने आश्वस्त किया है कि बीबीएमबी मामले में हिमाचल की हिस्सेदारी के दावे का जरूर कोई समाधान निकलेगा। पंजाब कभी किसी का हक नहीं रखता है और इस मामले को वे मिल-बैठकर सुलझाएंगे। मोदी सरकार पर किसानों की उपेक्षा के मुद्दे पर पत्रकार वार्ता करने शिमला आए मनप्रीत बादल मंगलवार को बीबीएमबी मुद्दे पर मीडिया के सवालों से घिर गए।
राजीव भवन शिमला में पत्रकारों ने पंजाब की ओर से हिमाचल को बीबीएमबी एरियर देने में आनाकानी करने पर कई सवाल किए। पहले तो मनप्रीत इसे अर्द्धन्यायिक मामला बताते रहे। बाद में जब उन्हें बताया गया कि इस पर अदालत का फैसला आ चुका है तो वे बोले- आप हमारी चमड़ी निकालकर उसके जूते भी पहनेंगे तो भी पंजाब इंकार नहीं करेगा।
पंजाब किसी का हक नहीं मारता। इस बारे में अंतरराज्यीय परिषद में भी बात हुई है। इस मसले का उन्हें ज्यादा इल्म भी नहीं है। बैठकर इसमें कोई न कोई समाधान ढूंढ लिया जाएगा।
बीबीएमबी में 4249 करोड़ का एरियर क्लेम कर रहा हिमाचल
1966 के पुनर्गठन अधिनियम के तहत तय शर्तों को पंजाब सरकार नहीं मान रही है। इसके अनुसार पंजाब और हरियाणा को जनसंख्या के आधार पर हिमाचल को जल विद्युत परियोजनाओं की 7.19 फीसदी हिस्सेदारी देनी है। दोनों ही राज्य हिमाचल को इसका हक देने से आनाकानी कर रहे हैं।
नब्बे के दशक में बीबीएमबी मामले को लेकर हिमाचल सरकार सुप्रीम कोर्ट गई। सितंबर 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के हक में फैसला सुनाया। इसके तहत 7.19 फीसदी की दर से बिजली देने के आदेश दिए गए। 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने अटार्नी जनरल को मामला सुलझाने के आदेश दिए। इसके तहत पंजाब सरकार को दो विकल्प दिए गए।
एक विकल्प ये दिया गया कि पंजाब सरकार हिमाचल को बकाया एरियर का भुगतान करे। दूसरा विकल्प ये दिया गया कि पांच से सात साल में बकाया बिजली हिमाचल को दी जाए। मगर इस सब पर पंजाब गौर नहीं कर रहा है। इस हिस्सेदारी के बदले हिमाचल सरकार ने 4249 करोड़ रुपये का एरियर क्लेम किया है। ये पंजाब, हरियाणा और बीबीएमबी के तमाम स्टेकहोल्डरों को देना है।