रिटेंशन पॉलिसी वापस न हुई तो करेंगे आंदोलन
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शिमला उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति ने भवनों को नियमित करने के लिए सरकार की ओर से लाए गए अध्यादेश को सिरे से खारिज कर दिया है। समिति के अध्यक्ष चंद्रपाल मेहता, उपाध्यक्ष कंवर भूपेंद्र सिंह और सचिव गोविंद चतरांटा ने बताया कि सरकार भवनों को नियमित करने के नाम पर बार-बार जनता को ठग रही है।
1997 से लेकर अब तक पांच सरकारें बदल चुकी हैं लेकिन हर सरकार ने जनता को कोरे आश्वासन के सिवाय और कुछ नहीं दिया। इस बार सरकार जो अध्यादेश वह दसवां असफल प्रयास है। यह प्रयास भी पहले की तरह लक्ष्य आधारित है और इसका मकसद अपने चहेतों और रसूखदारों को लाभ पहुंचना मात्र है।
शिमला उप नगरीय जन कल्याण समन्वय समिति ने ऐलान किया है कि अगर सरकार तुरंत इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई नहीं करती है तो समन्वय समिति सभी प्रभावितों और विभिन्न संगठनों को साथ लेकर संयुक्त संघर्ष समिति का गठन कर बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।
जनता से किया धोखा
संगठन के सचिव गोविंद चतरांटा ने कहा कि सरकारें ऐसे प्रस्ताव लाकर जनता को राहत देने के बजाए उनकी भावनाओं को आहत कर रही हैं और अपने चुनावी घोषणापत्रों में किए गए वायदों से पीछे हट रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारी मांग ‘जहां हैं जैसे हैं’ की तर्ज पर एकमुश्त भवनों को नियमित करने की थी मगर सरकार ने इस मांग के बजाय भारी-भरकम शुल्क लेकर भवनों को नियमित करने की शर्त लगाकर आम आदमी के भवन नियमितीकरण के सपने को चकनाचूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि मर्ज एरिया का कोई भी मकान टीसीपी एक्ट में किए गए नये संशोधन के अंतर्गत नियमित नहीं हो सकता क्योंकि अधिकतर लोगों ने नगर निगम में आने से पहले पंचायत में रहते हुए मकान बनाएं हैं जहां इतनी कड़ी शर्तें नहीं थीं। समिति के अध्यक्ष चंद्रपाल मेहता ने कहा कि नगर निगम में लाने के लिए सरकार ने इस क्षेत्र की जनता को विश्वास में लिए बगैर आनन-फानन में फैसला तो लिया लेकिन इसकी पेचीदगियों और इस क्षेत्र पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर गौर नहीं किया।