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सोलन की जेल में कैदी बना रहे ऑर्गेनिक खाद, सब्जियों के छिलकों से की जा रही तैयार
Mon, 23 Nov 2020 11:56 AM IST
अरविन्द ठाकुर
ललित कश्यप, अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
ललित कश्यप, अमर उजाला नेटवर्क, सोलन
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 23 Nov 2020 11:56 AM IST
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खाद (सांकेतिक)
- फोटो : अमर उजाला
हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों को सुधारकर उन्हें रोजगार से जोड़ने की कवायद रंग ला रही है। जेल में प्रशिक्षण लेने के बाद कैदी अब रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं बनाकर लाखों कमा रहे हैं। इन वस्तुओं को जेलों में आदान-प्रदान के अतिरिक्त बाजार में भी बेचा जा रहा है। सोलन कारागार में बंदी बेकरी वस्तुओं को तैयार कर रहे हैं। यहां सजा काट रहे कैदियों ने ऑर्गेनिक खाद बनाने का कार्य भी शुरू कर दिया है।
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इसमें कैदी सब्जियों के छिलकों और व्यर्थ पदार्थों को एक जगह इकट्ठा कर केंचुआ खाद तैयार कर रहे हैं। पहली बारी में यह खाद की एक, पांच और 10 किलो की पैकिंग बाजार में बेची जा चुकी हैं। इससे करीब 35 हजार का कारोबार हुआ है। इसके अलावा कैदी जेल परिसर में खाली जगह छोटे खेत बनाकर उसमें साग, धनिया, मटर और लहसुन भी उगा रहे हैं। इन फसलों से निकलने वाले व्यर्थ पदार्थों का केंचुआ खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा रहा है।
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दुकान और बाजार में बेचे जा रहे बेकरी उत्पाद
सोलन कारागार में कुल 135 बंदी हैं जिसमें से पांच सजा काट रहे हैं जबकि अन्य विचाराधीन बंदी हैं। ये सभी कारागार में कुछ न कुछ कारोबार कर रहे हैं। कुछ कैदी ओपन एयर जेल योजना के तहत कारागार के साथ एनएच पर दुकान चला रहे हैं। यहां पर वे अपने बनाए ब्रेड, बंद, मठियां, बिस्कुट, नमकीन बेच कर एक दिन ढाई से तीन हजार रुपये की सेल कर रहे हैं। कुछ बंदी बाजारों में उत्पाद को बेचने के लिए जाते हैं। कैदी कमीशन पर भी वस्तुओं को बेच रहे हैं। इस तरह वे जेल में बैठकर अपने घर का खर्च भी चला रहे हैं।
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कैदियों को दिया जा रहा रोजगार
सोलन कारागार के सहायक अधीक्षक दीपक शांडिल ने बताया कि महानिदेशक कारागार कैदियों को सुधारने और उन्हें रोजगार देने में सराहनीय कार्य कर रहे हैं। सोलन कारागार में कैदी बेकरी वस्तुओं के साथ ऑर्गेनिक खाद भी तैयार कर रहे हैं। इसे बाजारों में भी मांग के हिसाब से बेचा जा रहा है। इसमें सजा काट रहे पांच कैदी हर माह पांच से छह हजार रुपये कमा रहे हैं।