पीएम मोदी को खुश करने के लिए सरकार ने ताक पर रखे कायदे कानून
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क्वालिटी सेल गठित कर प्रदेश भर में हुए विकास कार्यों की गुणवत्ता पुख्ता करने के लिए सख्त कदम उठाने वाली जयराम सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के लिए अपने नियम कायदे ही भूल गई। धर्मशाला के पुलिस मैदान में 27 दिसंबर को पीएम की रैली प्रस्तावित है लेकिन, इस रैली से 10 दिन पहले पीडब्ल्यूडी विभाग ने आनन-फानन में बिना टेंडर ही रैली स्थल में सीढ़ियां बनाने और भूमि को समतल करने का कार्य शुरू कर दिया।
इस पर 30 से 40 लाख रुपये तक खर्च होने हैं। शीतकालीन सत्र के दौरान खुद सीएम जयराम ठाकुर ने दो बार पुलिस मैदान का निरीक्षण कर दिशा-निर्देश जारी किए थे। ठेकेदार भी बिना टेंडर ही 16 दिसंबर को फटाफट पुलिस मैदान में जनता के बैठने के लिए सीढ़ियां बनाने में जुट गया। ठेकेदार को विभाग ने 22 दिसंबर तक यानी 7 दिन में जनता के लिए सीढ़ियां बनाने और भूमि समतल करने के लिए कहा है।
इसके दो या तीन दिन बाद उन्हीं सीढ़ियों पर हजारों की संख्या में जनता बैठेगी। सीढ़ियों के ऊपर एक पेड़ गिरने की कगार पर है। इस सारे घटनाक्रम पर अफसर, ठेकेदार और भाजपा नेता अमर उजाला के सवालों से कन्नी काटने और गोलमाल जवाब देने में लगे रहे। अमर उजाला ने जब अफसरों और नेताओं का पक्ष जाना तो अंदरखाते बैक डेट में टेंडर निकालकर जान बचाने की जुगत भी शुरू हो गई है।
एक्सईएन ने माना बिना टेंडर हो रहा काम
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन सुशील डढवाल ने माना कि प्रधानमंत्री की रैली के लिए पुलिस मैदान में सीढ़ियां बनाने का काम बिना टेंडर हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ कार्य अरजेंट वर्क में आते हैं जो करना जरूरी होते हैं।
बिना टेंडर काम की हो निष्पक्ष जांच : सुधीर
डीसी संदीप कुमार ने कहा कि प्रधानमंत्री दौरे को लेकर कई अरजेंट वर्क करना जरूरी होते हैं। ऐसे अरजेंट वर्क को करने की औपचारिकताएं विभाग पूरी कर रहे होंगे।
विभाग के बोलने पर किया काम: ठेकेदार
पुलिस मैदान में सीढ़ियां बनाने का काम कर रहे ठेकेदार रोहित शर्मा ने बताया कि विभाग के बोलने पर काम किया जा रहा है। टेंडर काल किया गया है लेकिन इसकी तारीख याद नहीं हैं। इमरजेंसी में कई बार बिना टेंडर भी काम होता है।
धर्मशाला से पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि कहा कि पीएम दौरे को लेकर पुलिस मैदान का काम आननफानन में बिना प्लानिंग हो रहा है। सीढ़ियां धंस गईं या दुर्घटना हो गई तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। जब पीएम की रैली स्थल का काम ही बिना टेंडर होने लगेगा तो सरकारी व्यवस्था पर यह बड़ा सवाल लगाता है। इस कार्य की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।