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‘मौत’ इंतजार करती रही, ‘फरिश्तों’ ने ‘जिंदगी’ को जिता दिया

Thu, 14 May 2020 06:08 AM IST
Rajeev Rai न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर Published by: Rajeev Rai Updated Thu, 14 May 2020 06:08 AM IST
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Pregnant lady give birth to a child while travelling to other place in covid19 lockdown
कोरोना वायरस में गर्भवती - फोटो : social media

हमीरपुर में जिंदगी की जंग लड़ रहे जच्चा-बच्चा को बचाने के लिए ‘इंसानियत’ ने ऐसी रूपरेखा बनाई कि दोनों ने कोरोना काल में मौत को मात दे दी। हालात ऐसे बन गए कि मौत इंतजार करती रही फरिश्तों ने अपना काम कर दिया। बुधवार को भरुआसुमेरपुर निवासी बृजेश की पत्नी क्रांति को सुबह नौ बजे प्रसव पीड़ा हुई। बृजेश पत्नी को 15 किलोमीटर दूर स्थित जिला अस्पताल ले आए।

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यहां डॉक्टरों ने परीक्षण कर बताया कि महिला में खून की कमी है, ऐसे में यहां प्रसव कराना खतरे से खाली नहीं है। क्रांति को ओ पॉजिटिव खून चाहिए जो ब्लड बैंक में नहीं है। सिर्फ डोनर के जरिए खून मिल सकेगा। बृजेश ने अपने परिचित नगर पालिक परिषद के चेयरमैन कुलदीप निषाद के भाई अशोक निषाद को समस्या बताई। उन्होंने डोनर की खोज के लिए सोशल मीडिया में मैसेज वायरल कर दिया। इसी कवायद के बीच दोपहर साढ़े बारह बजे क्रांति को अचानक प्रसव का दर्द शुरू हो गया।
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डॉक्टर पूनम सचान ने प्रसूता की जान जोखिम में देख कानपुर रेफर कर दिया। बृजेश प्राइवेट एम्बुलेंस से क्रांति को लेकर निकल गए। लेकिन तीन किलोमीटर दूर यमुना पुल पर क्रांति ने बच्चे को जन्म दे दिया। एम्बुलेंस में हालात खराब होते देख बृजेश को लगा कि पत्नी को 70 किलोमीटर दूर ले जाना खतरे से खाली नहीं है। एम्बुलेंस वापस मोड़ ली। बृजेश रास्ते में पड़े एक नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा को ले गए जहां उन्होंने भर्ती करने मना कर दिया। हालात और खराब होते देख बृजेश जच्चा-बच्चा को वापस जिला अस्पताल ले आए।
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इधर, अशोक निषाद के वायरल हुए मैसेज पर जिले के तीन लोग ओ पॉजिटिव खून देने को निकल पड़े थे। अस्पताल से 18 किलोमीटर दूर पत्योरा से चले अनुज पांडेय सबसे पहले पहुंचे उन्होंने खून देना शुरू किया। तबतक शहर के बंगाली मोहाल निवासी लल्ला तिवारी भी पहुंच गए। उन्होंने भी रक्तदान किया। तभी 15 किलोमीटर दूर से पहुंचे भरुआसुमेरपुर के इमरान अंसारी ने भी महादान कर जच्चा-बच्चा की जान बचा ली। अब दोनों स्वस्थ हैं।

पूनम सचान, चिकित्सक, जिला अस्पताल, हमीरपुर

महिला के शरीर में खून की काफी कमी थी। अस्पताल में ओ पॉजिटिव खून नहीं होने से जच्चा और बच्चा दोनों की जान का खतरा था। ऐसे में उन्हें कानपुर रेफर किया गया था। रास्ते में प्रसव हो गया। सही वक्त पर डोनेटर मिल गए इसलिए दोनों की जान बच गई।


हरेंद्र सिंह यादव, ब्लड बैंक प्रभारी

लॉकडाउन के कारण व्यक्ति या संस्था के माध्यम से रक्तदान नहीं किया जा रहा है। ऐसे में ब्लड बैंक में खून की कमी है। ओ पॉजिटिव खून भी नहीं था। तीन डोनरों ने जो खून दिया उसी को ही प्रसूता को चढ़ाया गया है।

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