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ऊना: आलू की पैदावार कम, फिर भी मंडियों में किसानों की हो रही खूब चांदी

Tue, 30 Nov 2021 02:05 PM IST
Krishan Singh विकास चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
विकास चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Published by: Krishan Singh Updated Tue, 30 Nov 2021 02:05 PM IST
सार

जिला ऊना उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि इस बार बारिश से आलू की पैदावार आधी रह गई है। कई फसलों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है। हालांकि, निकट भविष्य में इस समस्या का हल निकालने के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

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Potato production is low in una, farmer getting good prices in the mandis
आलू की फसल निकालते किसान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले की 1700 हेक्टेयर जमीन पर किसान दो महीने आलू की फसल लगाते हैं। सितंबर से नवंबर के बीच उगाई जाने वाली इस फसल पर इस बार मौसम की मार पड़ी और पैदावार 50 फीसदी तक गिर गई। इससे किसानों को बड़े नुकसान का डर सता रहा था। हालांकि, मंडियों में आलू 16 सौ से तीन हजार प्रति क्विंटल तक आलू के दाम मिलने से किसानों को राहत मिली है। इससे एक कनाल में किसानों को तीन से चार हजार की बचत हुई है।

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कई किसानों के खेतों में भी आढ़तियों को फसल बेची
बताया जा रहा है कि पहले जहां एक कनाल में आठ से दस क्विंटल तक आलू की पैदावार होती थी, इस बार केवल औसतन चार से पांच क्विंटल प्रति कनाल ही आलू निकला है। जिले के किसानों ने आलू अमृतसर और दिल्ली की मंडियों में बेचा। कई किसानों के खेतों में भी आढ़तियों को फसल बेची। नवंबर की शुरुआत से आलू निकालने (पटाई) का काम शुरू हुआ था। अभी तक दाम 16 सौ से तीन हजार प्रति क्विंटल तक बिके। हालांकि, 20 नवंबर के आसपास पंजाब के किसान भी आलू खेतों में लेकर पहुंचने लगते हैं।
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कनाल जमीन पर फसल तैयार करने में चार से पांच हजार खर्च
इसके बाद दामों में 250 से 300 रुपये की कमी आई है। गांव पंडोगा के किसान देसराज ने कहा कि अक्तूबर में हुई बारिश से आलू की पैदावार में कमी आई है। उन्होंने करीब 300 कनाल में आलू लगाया है। 15 नवंबर से आलू निकालना शुरू किया। प्रति कनाल में औसतन चार से छह क्विंटल पैदावार हुई है। उसके बाद फसल आढ़ती को खेत में ही बेच दी। उन्हें खेत में ही 16 सौ से 18 सौ प्रति क्विंटल दाम मिल रहे हैं। एक कनाल जमीन पर फसल तैयार करने में चार से पांच हजार खर्च आता है, वहीं बिक्री सात से आठ हजार तक हुई है।
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इस बार बारिश से आलू की पैदावार आधी रह गई
करीब आठ कनाल में आलू उगाने वाले किसान सिद्धांत कुमार का कहना है छोटे किसानों आलू की फसल में बचत तभी होती है, जब मंडी में दाम अच्छे मिलें। इस बार पैदावार तो कम रही, लेकिन फसल लगाने का नुकसान नहीं हुआ। अगर बेमौसमी बारिश की मार न पड़ती तो आलू की फसल से हुआ फायदा डबल हो सकता है। जिला ऊना उपनिदेशक कृषि विभाग डॉ. अतुल डोगरा ने कहा कि इस बार बारिश से आलू की पैदावार आधी रह गई है। कई फसलों को मौसम की मार झेलनी पड़ी है। हालांकि, निकट भविष्य में इस समस्या का हल निकालने के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं।

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