देश से किया बड़ा वादा भूल गए पीएम मोदी
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन सहित अन्य देशों से भारत आने वाले सेब के आयात को कम करने के लिए इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का वादा भूल गए हैं। लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने हिमाचल आकर विदेशी सेब को रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने का वादा किया था, मगर अभी तक चीन-अमेरिका जैसे बडे़ सेब निर्यातक देशों से आयात को रोका नहीं जा सका है।
भारत में लगभग 45 देशों से सेब का आयात हो रहा है। सबसे ज्यादा आयात चीन से हो रहा है। दूसरे नंबर पर अमेरिका है। हाल ही में नरेंद्र मोदी के चीन दौरे पर हिमाचल के बागवानों को उनका किया वादा फिर याद आने लगा, क्योंकि सेब सीजन सिर पर है। चीन का फ्यूजी सेब और अमेरिका का रेड डिलिशियस सेब मार्केट में अटा पड़ा है।
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में 29 अप्रैल 2014 को सोलन में हुई रैली में कहा था कि दिल्ली में बैठी सरकार (तत्कालीन यूपीए सरकार) ने अपनी कमाई के चक्कर में सेब के बाजार को खुला छोड़ दिया है। जो भी देश चाहे, वह यहां सेब भेज सकता है। इससे हमारे बागवान नुकसान झेल रहे हैं। यदि उन्हें मौका मिला तो ये नहीं चलेगा।
29 अप्रैल को की थी घोषणा
नरेंद्र मोदी ने जो घोषणा 29 अप्रैल को की थी, उन्हें उसे पूरा करना चाहिए। इस ऐलान को किए एक साल हो गया है, मगर अभी तक उनका इस पर कोई ध्यान नहीं है। वह अपने वादे के मुताबिक इंपोर्ट ड्यूटी को बढ़ाए। मतदाता को एक बार बरगला सकते हैं। अब उन्हें जवाब देना होगा। मोदी को हिमाचल के सेब बागवानों से किया वादा नहीं भूलना चाहिए।
- सुखविंद्र सिंह सुक्खू, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश
पिछले कुछ समय से विदेशों से सेब आना काफी कम होने लगा है। अटल बिहारी वाजपेयी की ही सरकार ने आयात शुल्क को बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया था। यूपीए सरकार ने तो इसे और कम कर दिया। अभी नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बने एक ही साल हुआ है। उन्होंने कई उपाय शुरू कर दिए हैं। इस मुद्दे को घोषणा पत्र में शामिल करने वाले कांग्रेस के नेता बताएं कि उन्होंने इस पर कितनी बार केंद्र सरकार को पत्र भेजे।
- नरेंद्र बरागटा, पूर्व बागवानी मंत्री एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष
एप्पल स्टेट हिमाचल में बिक रहा अमेरिका और चीन का सेब
सेब उत्पादक राज्य हिमाचल में ही इन दिनों अमेरिका-चीन का सेब धड़ल्ले से बिक रहा है। मंडी, शिमला, कुल्लू समेत पूरे प्रदेश का बाजार विदेशी सेब से अटा पड़ा है। इसकी कीमत 200 से 300 रुपये प्रति किलो है। यह सेब चंडीगढ़, देहरादून और दिल्ली से प्रदेश में आ रहा है। राज्य में विदेशी सेब की मौजूदगू का एक बड़ा कारण कोल्ड स्टोर चेन अभाव है। इसके चलते लोगों को मंहगे दाम पर विदेशी सेब खरीदना पड़ रहा है। स्थानीय बागवानों को भी सीजन में औने-पौने दामों में अपना सेब बेचना पड़ता है।
ऐसे में चीन के फ्यूजी सेब और अमेरिका के रेड डिलिशियस सेब राज्य की बाजारों में छाये हैं। हिमाचल सेब उत्पादक संघ के प्रधान चतर सिंह का कहना है कि हिमाचल में कोल्ड स्टोर की समुचित व्यवस्था न होने से हिमाचल के बागवानों और सेब उपभोक्ताओं दोनों को नुकसान हो रहा है।
एपीएमसी मंडी के सचिव प्रकाश कश्यप का कहना है कि मंडियों में रोजाना विदेशी सेब पहुंच रहा है। विदेशी सेब को ज्यादा दिनों तक स्टोर किया जा सकता है। हिमाचली सेब की अपेक्षा इसमें शूगर की मात्रा कम होती है। उच्च गुणवत्ता के नाम पर ही अमेरिकी और चीन के सेब का आयात होता है।