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शिमला: बारिश के लिए इंद्रदेव की शरण में सूखे से बेहाल लोग, पढ़ें पूरा मामला
Sat, 10 Jul 2021 07:42 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/जुन्गा (शिमला)
अमर उजाला नेटवर्क, ऊना/जुन्गा (शिमला)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 10 Jul 2021 07:42 PM IST
सार
कई दिन से बारिश न होने से परेशान पीरन गांव के युवाओं ने शुक्रवार रात गांव में घूमकर साधटू नृत्य किया। माना जाता है कि इंद्र देव साधटू के नृत्य से खुश होकर बारिश करते हैं।
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बारिश के लिए किया नृत्य
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लंबे समय से सूखे से बेहाल लोग बारिश के लिए इंद्रदेव से प्रार्थना कर रहे हैं। बरसात के मौसम में भी फसलें सूखने लगी हैं। कई इलाकों में पानी की कमी हो गई है। शिमला जिले के ग्रामीण इलाकों में इंद्रदेव को खुश करने के लिए आज भी साधटू नृत्य की परंपरा कायम है। कई दिन से बारिश न होने से परेशान पीरन गांव के युवाओं ने शुक्रवार रात गांव में घूमकर साधटू नृत्य किया। माना जाता है कि इंद्र देव साधटू के नृत्य से खुश होकर बारिश करते हैं।
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गांव के युवाओं ने साधटू का वेश धारण कर देर रात घर-घर जाकर नृत्य किया। पीरन गांव के वरिष्ठ नागरिक अतर सिंह ठाकुर, हंसराज वर्मा, ट्रहाई गांव के प्रीतम ठाकुर ने बताया कि बीती रात स्थानीय युवाओं ने घर-घर जाकर साधटू नृत्य किया। शनिवार सुबह बारिश भी हो गई। लोग बारिश की प्रार्थना के लिए साधुओं पर पानी डालते हैं और उन्हें भिक्षा भी देते हैं। बताया कि भिक्षा में जो अन्न आदि मिलता है उसे सुबह ठौड़ माता के मंदिर में अर्पित किया जाता है।
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उधर, ऊना के नारी में बच्चों ने रब्बा-रब्बा मीं बरसा साडी कोठी दाणे पा... गीत गाकर इंद्रदेव से बारिश की प्रार्थना की। इसके लिए ग्रामीणों ने गांव के बच्चों को इकट्ठा किया। इसके बाद उनके चेहरों में स्याही पोतकर उन्हें लाइन में बैठा दिया। बच्चों ने अपनी एड़ियां रगड़-रगड़ कर इंद्रदेव को खुश करने के लिए गीत गाए। जब लंबे समय से बारिश न हो तो परंपरा है कि लोग मुंह पर स्याही पोतकर पानी डालकर एड़ियां रगड़ते थे या फिर एक गुड्डा बनाकर उसे जलाते थे।
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साथ ही इंद्रदेव को खुश करने के गीत गाकर बारिश की प्रार्थना करते थे। मान्यता है कि इसके बाद बारिश होती थी। नारी गांव के हरीश कौंडल, मुकेश, अभिनाष, विपिन, रेशम और जसवीर ने कहा कि इंद्रदेव से प्रार्थना करने के बाद उन्हें भोग भी लगाया गया ताकि इंद्रदेव खुशी-खुशी बरसात करें। उन्होंने कहा कि सूखे के कारण गैर सिंचित क्षेत्रों में किसानों की फसलें सूख रही हैं। अगर दो-चार दिन बारिश नहीं हुई तो फसलें पूरी तरह से सूख जाएंगी। ऊना जिले के विभिन्न स्थानों पर लोग बारिश के लिए अलग-अलग पारंपरिक उपाय कर रहे हैं।