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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Pensioners' Joint Committee has warned that pensioners will take to the streets if their arrears are withheld.

हिमाचल: पेंशनर्स सयुंक्त संघर्ष समिति ने चेताया, एरियर रोका तो सड़क पर उतरेंगे पेंशनर

Mon, 09 Feb 2026 08:51 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 09 Feb 2026 08:51 PM IST
सार

 यदि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने का बहाना बनाकर पेंशनरों और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज किया गया या एरियर रोका गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।

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Pensioners' Joint Committee has warned that pensioners will take to the streets if their arrears are withheld.
प्रदर्शन (सांकेतिक) - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार को चेतावनी दी है कि यदि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने का बहाना बनाकर पेंशनरों और कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (डीए) फ्रीज किया गया या एरियर रोका गया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। समिति ने सरकार से कहा कि वित्तीय हालत सुधारने के लिए पेंशनरों पर बोझ डालने के बजाय अपने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती करे। समिति की प्रदेश कार्यकारिणी की आपात बैठक शिमला में प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में हुई। बैठक में महासचिव इंदर पॉल शर्मा, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा, मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। संयुक्त संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशनरों की मांगों पर चर्चा के लिए सरकार ने एक सप्ताह के भीतर वार्ता के लिए नहीं बुलाया तो 17 और 18 फरवरी को शिमला में धरना-प्रदर्शन होगा और बजट सत्र के दौरान बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार के प्रधान वित्त सचिव देवेश कुमार गुप्ता की उस प्रस्तुति पर कड़ा ऐतराज जताया गया, जिसमें राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के कारण डीए फ्रीज करने और एरियर न देने जैसे सुझाव दिए गए हैं। समिति ने कहा कि सरकार के प्रतिनिधियों, सलाहकारों और अन्य खर्चों में कटौती के कोई प्रस्ताव नहीं हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। समिति ने बताया कि प्रदेश सरकार पर पेंशनरों और कर्मचारियों का 13 प्रतिशत डीए, 146 माह का डीए एरियर, संशोधित कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और चिकित्सा बिलों के रूप में करोड़ों रुपये बकाया हैं।
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कई पेंशनर बिना भुगतान के ही दुनिया से चले गए, जो बेहद संवेदनहीन स्थिति को दर्शाता है। हिमकेयर और सहारा जैसी योजनाओं को बंद करने या सामाजिक सुरक्षा पेंशन में कटौती के प्रस्तावों की भी कड़ी निंदा की गई। समिति ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले वर्षों में गलत फैसले लेकर और चेहतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियुक्तियां कर प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर की है। वहीं, विधायकों, मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के वेतन-भत्तों में वृद्धि की अधिसूचनाओं से बोझ और बढ़ा है। पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति ने मांग की कि सरकार पेंशनरों की सभी देनदारियों का शीघ्र भुगतान करे, डीए फ्रीज करने का विचार त्यागे और खर्चों में कटौती करे।
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