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Himachal: हिमाचल के इस लाल चावल का 800 रुपये प्रति किलो है दाम, स्वास्थ्य के लिए माना जाता है लाभदायक

Tue, 03 Dec 2024 02:57 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/रामपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/रामपुर Published by: Krishan Singh Updated Tue, 03 Dec 2024 02:57 PM IST
सार

 कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खाद्यान्न के रूप में उपभोग की जाने वाली लाल चावल की फसल लगभग 10 हजार वर्ष पुरानी आंकी जाती है।  सुगंधित लाल चावल की फसल में विशेष पोषाहार तथा औषधीय तत्व हैं।  रामपुर के लवी मेले में बिक्री के लिए रखे गए विभिन्न किस्मों के चावल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। 

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Peja Rice price of this Himachal rice is 800 rupees per kg, it is beneficial for health
पैजा चावल - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में विलुप्त होने की कगार पर पहुंची लाल चावल की फसल अब फिर से लहलहाने लगी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खाद्यान्न के रूप में उपभोग की जाने वाली लाल चावल की फसल लगभग 10 हजार वर्ष पुरानी आंकी जाती है। सुगंधित लाल चावल की फसल में विशेष पोषाहार तथा औषधीय तत्व हैं। इन्हें परंपरागत रूप में ब्लड प्रेशर, कब्ज, महिला रोग, ल्यूकोरिया जैसे रोगों के उपचार में प्रयोग किया जा रहा है। इस दिनों शिमला जिले के रामपुर के लवी मेले में बिक्री के लिए रखे गए विभिन्न किस्मों के चावल लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इनमें छोहारटू व पैजा चावल खास है। 

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क्या है पैजा  चावल
लवी मेले में बीते कई सालों से चावल का कारोबार करने वाले कारोबारी अमरनाथ ने बताया कि पैजा एक जैविक चावल है और शुगर फ्री है। शुगर के मरीज इस चावल का सूप को पी सकते हैं। दस्त में भी इसका सूप लाभदायक होता है। इस चावल का सूप पेट के लिए रामवाण है। उन्होंने कहा कि इस खास किस्म के चावल का पेटेंट करवाया गया है। यह राष्ट्रपति से सम्मानित चावल है। इस चावल का दाम प्रति किलो 800 रुपये है। 

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इन क्षेत्रों में होता है लाल चावल
गाैरतलब है कि लाल चावल की फसल को पानी की बहुतायत वाले चिड़गांव, रोहड़ू, रामपुर, कुल्लू घाटी, सिरमौर तथा कांगड़ा जिला के ऊपरी क्षेत्रों में किया जाता है। राज्य में लोकप्रिय लाल चावल की किस्मों में रोहड़ू में छोहारटू, चंबा में सुकारा तियान, कांगड़ा में लाल झिन्नी तथा कुल्लू में जतू और मटाली किस्में किसानों की ओर से उगाई जाती हैं।   लाल चावल की फसल मध्य हिमालय के पानी की बहुतायत वाले क्षेत्रों में मोटी मिट्टी में गर्म तथा आर्र्दता भरे वातावरण में उगाई जाती है। इस समय यह फसल 213 हेक्टेयर भूमि में शिमला जिला के सुरु कूट, कुथरु, गानवी, जांगल, नाडाला, कलोटी, देवीधार आदि क्षेत्रों में उगाई जाती है। चंबा जिला में लाल चावल की फसल 107 हेक्टेयर में मानी, पुखरी, साहो, कीड़ी, लाग, सलूणी और तीसा क्षेत्रों में उगाई जाती है। 

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