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मरीजों को पीएचसी के छत पर लेटाकर चढ़ाया ग्लूकोज, सरकारी अस्पताल में नहीं है बेड
Wed, 24 Apr 2019 08:45 AM IST
vivek shukla
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोहर (मंडी)
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Published by: vivek shukla
Updated Wed, 24 Apr 2019 08:45 AM IST
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चुनावों के समय भले ही नेता बड़े-बड़े वायदे करते हो, लेकिन सूबे में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र सराज के दो गांवों में डायरिया फैल गया। छतरी और लस्सी गांवों के करीब आठ दर्जन लोग चपेट में आ गए। इनमें से एक दर्जन को उपचार के लिए पीएचसी छतरी में दाखिल किया गया। यहां मात्र एक बेड है।
ऐसे में अन्य मरीजों को अस्पताल की छत पर दरियों पर लेटाकर ग्लूकोज चढ़ाना पड़ा। एक स्टैंड पर तीन-तीन ग्लूकोज की बोतलें टांगी गईं। मरीज धूप में लैंटर पर ही रहे। हालांकि, शाम को गंभीर मरीजों को 20 किलोमीटर दूर सिविल अस्पताल जंजैहली भेज दिया।
उधर, आईपीएच महकमे ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। गंदे पानी से ही डायरिया फैलने का अंदेशा है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में उपचार शुरू कर दिया है और दवाइयां बांट दी हैं। छतरी पीएचसी में भर्ती मरीजों में सुमित्रा, शीतल, मोनिका, रंजना, प्रोमिला, नताशा को खुले में ग्लूकोज चढ़ाया गया। पीएचसी छतरी के प्रभारी डॉक्टर विवेक ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। मरीजों का उपचार चल रहा है और दवाइयां वितरित कर दी गई हैं।
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डायरिया की भनक लगते ही विभाग ने पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। -सुशील कुमार, सहायक अभियंता, आईपीएच विभाग
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ऐसे में अन्य मरीजों को अस्पताल की छत पर दरियों पर लेटाकर ग्लूकोज चढ़ाना पड़ा। एक स्टैंड पर तीन-तीन ग्लूकोज की बोतलें टांगी गईं। मरीज धूप में लैंटर पर ही रहे। हालांकि, शाम को गंभीर मरीजों को 20 किलोमीटर दूर सिविल अस्पताल जंजैहली भेज दिया।
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उधर, आईपीएच महकमे ने पानी के सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं। गंदे पानी से ही डायरिया फैलने का अंदेशा है। स्वास्थ्य विभाग ने गांव में उपचार शुरू कर दिया है और दवाइयां बांट दी हैं। छतरी पीएचसी में भर्ती मरीजों में सुमित्रा, शीतल, मोनिका, रंजना, प्रोमिला, नताशा को खुले में ग्लूकोज चढ़ाया गया। पीएचसी छतरी के प्रभारी डॉक्टर विवेक ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। मरीजों का उपचार चल रहा है और दवाइयां वितरित कर दी गई हैं।
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डायरिया की भनक लगते ही विभाग ने पानी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए हैं। -सुशील कुमार, सहायक अभियंता, आईपीएच विभाग