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हिमाचल में पैराग्लाइडिंग बन रहा मौत का खेल, ताक पर कायदे-कानून
Tue, 19 Nov 2019 11:40 AM IST
Krishan Singh
संजय ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
संजय ठाकुर, अमर उजाला, कुल्लू
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 19 Nov 2019 11:40 AM IST
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पैराग्लाइडिंग मनाली
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व-विख्यात पर्यटन नगरी मनाली में पैराग्लाइडिंग का रोमांच पर्यटकों की जान ले रहा है। अप्रैल से लेकर नवंबर तक सात महीनों के अंदर पैराग्लाइडिंग के चार हादसे हो चुके हैं और चार सैलानियों की जान जा चुकी है। तमिलनाडु से सोमवार को पत्नी के साथ मनाली हनीमून मनाने आए अरविंद की ऊझी घाटी के फलाइन-डोभी साइट पर पैराग्लाइडिंग के दौरान मौत हो गई।
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इसी रूट पर अप्रैल माह में कनाडा के विदेशी सैलानी अलाबचो और ब्यासर के पायलट नरेश भी मौत के मुंह में चले गए थे। इसके अलावा मई माह में सोलंगनाला में पैराग्लाइडिंग के दौरान चंडीगढ़ मोहाली के अमनदीप की मौत हो गई थी। दो दशकों में पैराग्लाइडिंग के दौरान दो दर्जन सैलानियों और पायलटों की मौत होे चुकी है।
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इस खेल के नियम न होने और जान का जोखिम ज्यादा होने का खतरा भांपकर 2004 में प्रदेश के उच्च न्यायालय ने इस खेल पर रोक लगा दी थी, लेकिन बाद में पायलटों के रजिस्ट्रेशन समेत अन्य कानून बनाए जाने के बाद इसे फिर शुरू कर दिया गया, लेकिन ये नियम कायदे कितने लागू हुए और कितने फाइलों में ही रह गए इसका अंदाजा पैराग्लाडिंग हादसों को देखकर लगाया जा सकता है।
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सोमवार को हुए हादसे ने एक नवविवाहित जोड़े की जिंदगी बसने से पहले ही उजाड़ दी है। पुलिस अधीक्षक कुल्लू गौरव सिंह ने कहा कि पुलिस ने मृतक के परिजनों को सूचना दे दी है। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप देगी।